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________________ पय- १२ अवहीरंति कालओ, खेत्तओ रूवपक्खित्तेहिं मणुस्सेहिं सेढी अवहीरति तीसे सेढीए काल-खेत्तेहिं अवहारो मग्गिज्जइ-असंखेज्जाहिं उस्सप्पिणि-ओसप्पिणीहिं कालओ, खेत्तओ अंगुलपढमवग्गमूलं ततियवग्गमूलपडुपपण्णं तत्थं णं जेते मुक्केल्लगा ते जहा- ओरालिया ओहिया मुक्केल्लगा, वेउव्वियाणं भंते पुच्छा गोयमा दुविहा पन्नत्ता तं जहा- बद्धेल्लगा य मुक्केल्लगा य तत्थ णं जेते बद्धेल्लगा ते णं संखेज्जा समए- समए अवहीरमाणा - अवहीरमाणा संखेज्जेणं कालेणं अवहीरंति नो चेव णं अवहिया सिया तत्थ णं जेते मुक्केल्लगा ते णं जहा- ओरालिया ओहिया, आहारगसरीरा जहा- ओहिया तेयाकम्मया जहा- एतेसिं चेव ओरालिया, वाणमंतरणं जहा- नेरइयाणं ओरालिया आहारगा य वेउव्वियसरीरगा जहा- नेरइयाणं नवरं-ता णं सेढीणं विक्खंभसूई संखेज्जजोयणसयवग्गपलिभागो पयरस्स मुक्केल्लया जहा - ओहिया ओरालिया तेया-कम्मया जहा- एएसिं चेव वेउव्विया, जोतिसियाणं एवं चेव नवरं - तासि णंसेढीणं विक्खंभसूई बेछप्पण्णंगुलसयवग्गपलिभागो पयरस्स, वेमाणियाणं एवं चेव नवरं - तासि णं सेढीणं विक्खंभसूई अंगुलबितियवग्गमूलं ततियवग्गमूलपडुप्पन्नं अहव णं अंगुलततियवग्गमूलघणपमाणमेत्ताओ सेढीओ सेसं तं चेव । मुनि दीपरत्नसागरेण संसोधितः संपादितश्च बारसमं पयं समत्तं [] तेरसमं परिणाम पयं [४०५] कतिविहे णं भंते परिणामे पन्नत्ते गोयमा दुविहे परिणामे पन्नत्ते तं जहाजीवपरिणामे य अजीवपरिणामे य । [ ४०६ ] जीवपरिणामे णं भंते कतिविहे पन्नत्ते गोयमा दसविहे पन्नत्ते तं जहागतिपरिणामे इंदियपरिणामे कसायपरिणामे लेसापरिणामे जोगपरिणामे उवओगपरिणामे नाणपरिणामे दंसणपरिणामे चरित्तपरिणामे वेदपरिणामे । [४०७] गतिपरिणामे णं भंते कतिविहे पन्नत्ते गोयमा चउव्विहे० निरयगतिपरिणामे तिरियगतिपरिणामे मणुयगतिपरिणामे देवगतिपरिणामे, इंदियपरिणामे णं पुच्छा गोयमा पंचविहे० सोइंदियपरिणामे चक्खिंदियपरिणामे घाणिदियपरिणामे जिब्भिंदियपरिणामे फासिंदियपरिणामे, कसाय परिणामे णं पुच्छा गोयमा चउव्विहे प० कोहकसायपरिणामे मानकसायपरिणामे मायाकसायपरिणामे लोभकसायपरिणामे, लेस्सापरिणामे णं पुच्छा गोयमा छव्विहे प० कण्हलेस्सापरिणा नीललेस्सापरिणामे काउलेस्सापरिणामे तेलेस्सापरिणामे पम्हलेस्सापरिणामे सुक्कलेस्सापरिणामे जोगपरिणामे णं पुच्छा गोयमा तिविहे प० मणजोगपरिणामे वइजोगपरिणामे कायजोगपरिणामे, ओ परिणामे णं पुच्छा गोयमा दुविहे प० सागारोवओगपरिणामे य अणागारोवओगपरिणामे य, नाणपरिणामे णं पुच्छा गोयमा पंचविहे प० आभिणिबोहियनाणपरिणामे सुयनाणपरिणामे ओहिनाणपरिणामे मणपज्जवनाणपरिणामे केवलनाण-परिणामे, अन्नाणपरिणामे णं भंते पुच्छा मतिअन्नाणपरिणामे सुयअन्नाणपरिणामे विभंगनाणपरिणामे, दंसण-परिणामे णं पुच्छा गोयमा तिविहे प सम्मद्दंसणपरिणामे मिच्छादंसणपरिणामे सम्मामिच्छादंसण-परिणामे, चरित्तपरिणामे णं पुच्छा गोयमा पंचविहे पन्नत्ते तं जहा- सामाइयचरित्तपरिणामे छेदोवट्ठावणियचरित्तपरिणामे [दीपरत्नसागर संशोधितः ] [107] [१५- पन्नवणा]
SR No.003729
Book TitleAgam 15 Pannavana Chauttham Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2013
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 15, & agam_pragyapana
File Size3 MB
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