SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 7
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ दुगतिया तिआगतिया परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता समणाउसो से त्तं बायरपुढविक्काइया से त्तं पुढविकाइया । [१७] से किं तं आउक्काइया आउक्काइया दुविहा पन्नत्ता तं जहा- सुहम-आउक्काइया य बायरआउक्काइया य सुहुमआउक्काइया दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्ता य अपज्जत्ता य तेसिं णं भंते जीवाणं कई सरीरया पन्नत्ता गोयमा तओ सरीरया पन्नत्ता तं जहा- ओरालिए तेयए कम्मए जहेव सुहुमपडिवत्ति-१ पुढविक्काइयाणं नवरं- थिगसंठिया पन्नत्ता सेसं तं चेव जाव दुगइया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता से त्तं सुमआउक्काइया । [१८] से किं तं बायरआउक्काइया बायरआउक्काइया अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- ओसा हिमे जाव जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्ता य अपज्जत्ता य तं चेव सव्वं नवरं-थिगसंठिया चत्तारि लेसाओ आहारो नियमा छद्दिसिं उववाओ तिरिक्खजोणि-मणुस्स-देवेहिंतो ठिती जहन्नेणं अंतोमुत्तं उक्कोसेणं सत्तवाससहस्साई सेसं तं चेव जहा- बायरपुढविकाइया जाव दुगतिया तिआगतिआ परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता समणाउसो सेत्तं बायरआउक्काइया सेत्तं आउक्काइया [१९] से किं तं वणस्सइकाइया वणस्सइकाइया दुविहा पन्नत्ता तं जहासहमवणस्सइकाइया य बायरवणस्सइकाइया य । [२०] से किं तं सुहमवणस्सइकाया सुहमवणस्सइकाइया दुविहा पन्नत्ता तं जहापज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य तहेव नवरं-अणित्थंसठिया दुगतिया दुआगतिया अपरित्ता अनंता अवसेसं जहा- पुढविक्काइयाणं से तं सुहमवणस्सइकाइया । [२१] से किं तं बायरवणस्सइकाइया बायरवणस्सइकाइया दुविहा पन्नत्ता तं जहापत्तेयसरीरवायरवणस्सइकाइया य साहारणसरीबायरवणस्सइकाइया य । [२२] से किं तं पत्तेयसरीरबायरवणस्सइकाइया पत्तेयसरीरबायरवणस्सइकाइया वालसविहा पन्नत्ता तं जहा - [२३] रूक्खा गुच्छा गुम्मा लत्ताय वल्लीय पव्वगा चेव । तण वलय हरिय ओसहि जलरुह कुहणा य बोधव्वा ।। [२४] से किं तं रुक्खा रुक्खा दुविहा पन्नत्ता तं जहा- एगढिया य बहबीया य, से किं तं एगट्ठिया एगट्ठिया अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- निबंब जंबु कोसंब साल अंकोल्ल पीलु सेलू य जाव नाग नागरुक्खे सीवण्णि तहा असोगे य जे यावण्णे तहप्पगारा एतेसि णं मलावि असंखेज्जजीविया एवं कंदा खंधा तया साला पवाला पत्ता पत्तेयजीवा पुप्फाइं अणेगजीवाई फला एगट्ठिया से तं एगट्ठिया, से किं तं बहुबीया, बहुबीया अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- अत्थिय-तेंदुय-उंबर-कविढे आमलग-फणस-दाडिनग्गोह-काउंबरीय-तिलय-लउय-लोद्धे धवे जे यावण्णे तहप्पुगारा एतेसि णं मूलावि असंखेज्जजीविया जाव फला बहबीयगा सेत्तं बहजी-यगा सेत्तं रुक्खा एवं जहा पन्नवणाए तहा भाणियव्वं जाव जे यावण्णे तहप्पगारा सेत्तं कुहणा । [२५] नाणाविहसंठाणा रुक्खाणं एगजीविया पत्ता । दीपरत्नसागर संशोधितः] [6] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy