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पडिवत्ति-३
• तच्चाए पडिवत्तीए तिरिक्ख जोणिअस्स पढमो उद्देसओ समत्तो •
[] तिरिक्खजोणिय - बीओ उद्देसो []
[१३४] कतिविहा णं भंते संसारसमावण्णगा जीवा पन्नत्ता गोयमा छव्विहा संसारसमावण्णगा जीवा-पुढविकाइया जाव तसकाइया से किं तं पुढविकाइया दुविहा पन्नत्ता तं सुहुमपुढविकाइया बायर-पुढविकाइया से किं तं सुहुमपुढविकाइया दुविहा पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य से तं सुहुमपुढविक्काइया से किं तं बदारपुढविक्काइया दुविहा पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य एवं जहा - पन्नवणाए, सण्हा सत्तविहा पन्नत्ता, खरा अनेगविहा पन्नत्ता जाव असंखिज्जा से तं बारपुढविक्काइया से तं पुढविक्काइया एवं चेव जइ पन्नवणाए तहेव निरवसेसं भाणियव्वं जाव वणप्फइकाइया एवं जत्थेको तत्थ सिय संखिज्जा सिय असंखिज्जा सित अनंता से तं बादरवणस्सइकाइया से तं वणप्फइकाइया, से किं तं तसकाइया चउविहा पन्नत्ता तं बेइंदिया जाव पंचिंदिया से किं तं बेइंदिया अणेगविहा पन्नत्ता एवं जहेव पन्नवणे तहेव निरवसेसं भाणियव्वं ति जाव सव्वट्ठसिद्धगा देवा से तं अनुत्तरोववाइया से तं देवा से तं पंचिंदिया से त्तं तसकाइया ।
[१३५] कतिविधा णं भंते पुढवी पन्नत्ता गोयमा छव्विहा पुढवी पन्नत्ता तं जहासण्हपुढवी सुद्धपुढवी वालुयापुढवी मणोसिलापुढवी सक्करापुढवी खरुवुढवी, सण्हपुढवीणं भंते केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा जहण्णेणअंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं एगं वाससहस्सं सुद्धपुढवीपुच्छा गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बारस वाससहस्साइं, वालुयापुढवीपुच्छा गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं चोद्दसवास-सहस्साइं मणोसिलापुढवीपुच्छा गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं सोलस वाससहस्साइं सक्करापुढ-वीपुच्छा गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं अट्ठारस वाससहस्साइं खरपुढवीपुच्छा गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बावीसं वाससहस्साइं नेरइयाणं भंते केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा जहण्णेणं दस वाससहस्साइं उक्कोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाइं ठितीपदं सव्वं भाणियव्वं जाव सव्वट्ठसिद्धदेवत्ति जीवे णं भंते जीवेत्तिं कालत्तो केवच्चिरं होइ गोयमा सव्वद्धं पुढविकाइए णं भंते पुढविकाइएत्ति कालतो केवच्चिरं होति गोयमा सव्वद्धं एवं जाव तसकाइए ।
[१३६] पडुप्पन्नपुढविकाइया णं भंते केवतिकालस्स निल्लेवा सिता गोयमा जहण्णपदे असंखेज्जाहिं उस्सप्पिणिओसप्पिणीहिं उक्कोसपदेवि असंखेज्जाहिं उस्सप्पिणी-ओसप्पिणीहिं-जहण्णपदातो उक्कोसपए असंखेज्जगुणा एवं जाव पडुप्पन्नवुक्काइया, पडुप्पन्नवणप्फकाइया णं भंते केवतिकालस्स निल्लेवा सिता गोयमा पडुप्पन्नवणप्फकाइयाणं नत्थि निल्लेवणा, पडुप्पन्नतसकाइया णं भंते केवतिकालस्स निल्लेवा सिया, पडुप्पन्नतसकाइया जहण्णपदे सागरोवमसतपुहत्तस्स उक्कोसपदेवि सागरोवमसत-पुहत्तस्स - जहण्णपदा उक्कोसपदे विसेसाहिया ।
[१३७] अविसुद्धलेस्से णं भंते अणगारे असमोहतेणं अप्पाणेणं अविसुद्धलेस्सं देवं देविं अणगारं जाणइ-पासइ गोयमा नो इणट्ठे समट्ठे, अविसुद्धलेस्से णं भंते अणगारे असमोहत्तेणं अप्पाणेणं विसुद्धलेस्सं देवं देविं अणगारं जाणइ-पासइ गोयमा नो इणट्ठे समट्ठे, अविसुद्धलेस्से णं भंते अणगारे समोहतेणं अप्पाणेणं अविसुद्धलेस्सं देवं देविं अणगारं जाणति-पासति गोयमा नो इणट्टे समट्ठे, [दीपरत्नसागर संशोधितः]
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[१४- जीवाजीवाभिगमं ]