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________________ निरए नेरइयाणं दुक्खसयाइं अविस्सामं ।। [१२८] एत्थ य भिन्नमुत्तो पोग्गल असुहा य होइ अस्साओ उववाओ उप्पाओ अच्छि सरीरा उ बोद्धव्वा ।। [१२९] से तं नेरइया । ० तच्चाए पडिवत्तिए तइओ उद्देसो समत्तो . 1 "तिरिक्खजोणिय" पढमो-उद्देसो [] [१३०] से किं तं तिरिक्खजोणिया तिरिक्खजोणिया पंचविधा पन्नत्ता तं जहा- एगिंदियति रिक्खजोणिया जाव पंचिंदियतिरिक्खजोणिया य से किं तं एगिंदियतिरिक्खजोणिया एगिदियतिरिक्खजोणिया पंचविहा पन्नत्ता तं जहा- पुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया जाव वणस्सइकाइयएगिदियतिरिक्खजोणिया से किं तं पुढविक्काइयएगिदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- सुहुमपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया बादरपुढविकाइयएगिदियतिरिक्खजोणिया य से किं तं सुहमपुढविकाइएगिंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तसुहमपुढविकाइएगिदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तबादरपुढविकाइएगिंदियतिरिक्खजोणिया अपज्जत्तबादरपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया से तं बादरपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया से तं पुढविकाइएगिंदिया, से किं तं आउक्काइयएगिदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता एवं जहेव पुढविकाइयाणं तहेव आउकायभेदो एवं जाव वणस्सतिकाइया से तं वणस्सइकायएगिदियतिरिक्खजोणिया, से किं तं बेइंदियतिरिक्खजोणिया बेइंदियतिरिक्खजोणिया दुविधा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगबेइंदियतिरिक्खजोणिया अपज्जत्तगबेइंदियतिरिक्खजोणिया से तं बेइंदियतिरिक्खजोणिया एवं जाव चउरिंदिया, से किं तं पंचेंदियतिरिक्खजोणिया तिविहा पन्नत्ता जलयर पंचेंदिय तिरिक्खजोणिया थलयर पंचेंदियतिरिक्खजोणिया खहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं जलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दविहा पन्नत्ता तं जहा- संमच्छिमजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य गब्भवक्कंतियजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य से किं तं समुच्छिमजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगसंमुच्छिमजलयचपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं गब्भवक्कंतियजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पन्नत्ता तं जहापज्जत्तगगब्भवक्कंतियजलयर पंचेंदियतिरिक्खजोणिया अपज्जत्तगगब्भवक्कतियजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से तं जलयरपंचेंदिय-तिरिक्खजोणिया से किं तं थलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया दुविधा पन्नत्ता तं जहा- चउप्पयथलयरपंचेंदिय-तिरिक्खजोणिया परिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोमिया से किं तं चउप्पदथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- समुच्छिमचउप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया गब्भवक्कंतियचउप्पयथलयर-पंचेंदियतिरिक्खजोणिया य जहेव जलयराणं तहेव चउक्कतो भेदो सेत्तं चउप्पदथलयरपंचेंदियतिरिक्ख-जोणिया से किं तं परिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- उरपरिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया भुयपरिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं उरपरिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नत्ता तं जहा- जहेव जलयराणं तहेव चउक्कतो भेदो एवं भूयपरिसप्पाणवि दीपरत्नसागर संशोधितः] [36] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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