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________________ पज्जत्तगावि एतेसि णं भंते पुढविकाइयाणं पज्जत्तगाण अपज्जत्तगाण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा पुढविकाइया अपज्जत्तगा पुढविकाइयापज्जत्तगा संखेज्जगुणा, सव्वत्थोवा आउक्काइयाअपज्जत्तगा पज्जत्तगा संखेज्जगुणा जाव वणस्सतिकाइयावि सव्वत्थोवा तसकाइय पज्जत्तगा तसकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा एएसि णं भंते पुढविकाइयाणं जाव तसकाइयाणं पज्जत्तग-अपज्जत्तगाण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा तसकाइया पज्जत्तगा, तसकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा, तेउक्काइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा, पुढविकाइया आउक्काइया वाउक्काइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, तेउक्काइयापज्जत्तगा संखेज्जगुणा पुढवि-आउ-वाउपज्जत्तगा विसेसाहिया वणस्सतिकाइया अपज्जत्तगा अनंतगुणा वणस्सतिकाइया पज्जत्तगा [संखेज्जगुणा] विसेसाहिय । [३५२] सुहमस्स णं भंते केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणवि अंतोमुहत्तं एवं जाव सुहमणिओयस्सं एवं अपज्जत्तगाणवि पज्जत्तगाणवि जहण्णेणवि उक्कोसेणवि । [३५३] सुहुमे णं भंते सुहुमेत्ति कालतो केवचिरं होति गोयमा जहण्णेणं अंतोमुत्तं उक्कोसेणं पडिवत्ति-५ असंखेज्जकालं जाव असंखेज्जा लोया सव्वेसिं पुढविकालो जाव सुहमणिओयस्स पुढविकालो अपज्जत्तगाणं सव्वेसिं जहण्णेणवि उक्कोसणवि अंतोमुहुत्तं एवं पज्जत्तगाणवि सव्वेसिं जहण्णेणवि उक्कोसेणवि अंतोमुहत्तं । [३५४] सुहमस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं असंखेज्जं कालं-असंखेज्जाओ उस्सप्पिणी-ओसप्पिणीओ कालओ खेत्तओ अंगुलस्स असंखेज्जतिभागो सुहमपुढविकाइयस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहन्नेणं अंतोमुत्तं उक्कोसेणं अनंत कालं जाव आवलियाए असंखेज्जतिभागे एवं जाव वाऊ सुहमवणस्सति-सुहम-निओगस्स अंतरं जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं जहा ओहियस्स अंतरं एवं अपज्जत्ता-पज्जत्तगाणवि [अंतरं] । [३५५] एवं अप्पाबहुगं-सव्वत्थोवा सुहुमतेउकाइया सुहुमपुढविकाइया विसेसाहिया सुहुमआठवाऊ विसेसाहिया, सुहमणिओया असंखेज्जगुणा सुहमवणस्सतिकाइया अनंतगुणा सुहमा विसेसाहिया एवं अपज्जत्तगाणं पज्जत्तगाणवि एवं चेव एतेसि णं भंते सुहमाणं पज्जत्तापज्जत्ताणं कयरे कयरेहितो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा सव्वत्थोवा सुहमा अपज्जत्तगा, सुहमा पज्जत्ता संखेज्जगुणा एवं जाव सुहमणिगोया, एएसि णं भंते सुहमाणं सुहमपुढविकाइयाणं जाव सुहमणिओयाण य पज्जत्ता-पज्जत्ताण य कयरे कयरहितो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा सव्वत्थोवा सुहमतेउकाइया अपज्जत्तगा सुहुमपुढविकाइयाअपज्जत्तगा विसेसाहिया सुहुमआउ-काइयाअपज्जत्ता विसेसाहिया सुहुमवाउकाइया अपज्जत्ता विसेसाहिया सुहुमतेउका-इयापज्जत्तगा संखेज्जगुणा सुहुमपुढवि-आउ-वाउपज्जत्तगा विसेसाहिया सुहुमणिओयाअपज्जत्तगा असंखेज्ज-गुणासुहमणिओया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा सुहुमवणस्सतिकाइया अपज्जत्तगा अनंतगुणा सुहुमअपज्जत्ता विसेसाहिया सुहुमवणस्सइकाइया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा सुहुमा पज्जत्ता विसेसाहिया । दीपरत्नसागर संशोधितः] [132] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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