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________________ जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बारस संवच्छराणि एवं तेइंदियस्स एगूणपण्णं राइंदियाणं चउरिंदियस्स छम्मासा पंचिंदियस्स तेत्तीसं सागरोवमाइं, एगिंदियअपज्जत्तगस्स णं केवतियं कालं ठिती पन्नत्ता गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेवि अंतोमुहुत्तं एवं पंचण्हवि, एगिंदियपज्जत्तगस्स णं जाव पंचिंदियाणं पुच्छा गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बावीस वाससहस्साइं अंतोमुहुत्तूणाइं एवं उक्कोसियावि ठिती अंतोमुत्तूणा सव्वेसिं पज्जत्ताणं कायव्वा एगिदए णं भंते एगिदिएत्ती कालओ केवचिरं होइ गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं वणस्सतिकालो बेइंदियस्स णं भंते बेइंदिएत्ति कालओ केवचिरं होइ गोयमा जहन्नेणं अंतोमहत्तं उक्कोसेणं संखेज्जं कालं जाव चउरिदिए संखेज्जं कालं, पंचेंदिए णं भंते पंचिंदिएत्ति कालओ केवचिरं होइ गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं सागरोवमसहस्सं सातिरेगं एगिदियअपज्जत्तए णं भंते कालओ केवचिरं होति गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणवि अंतोमुहुत्तं जाव पंचिंदिय-अपज्जत्तए, एगिदियपज्जत्तए णं भंते कालओ केवचिरं होति गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं पडिवत्ति -४ संखिज्जाइं वाससहस्साइं एवं बेइंदिएवि नवरिं-संखेज्जाइं वासाइं तेइंदिए णं भंते संखेज्जा राइंदिया चउरिदिए णं संखेज्जा मासा पंचिंदिए सागरोवमसयपहत्तं सातिरेगं, एगिंदियस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं दो सागरोवमसहस्साइं संखेज्जवासमब्भहियाइं बेइंदियस्स णं केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं वणस्सइकालो एवं तेइंदियस्स चउरिंदियस्स पंचेंदियस्स अपज्जत्तगाणं एवं चेव पज्जत्तगाणवि एवं चेव । [३४५] एएसि णं भंते एगिदियाणं बेइंदियामं तेइदियाणं चरिंदियाणं पंचिदियाणं य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा बहया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा पंचेंदिया, चरिंदिया विसेसाहिया, तेइंदिया विसेसाहिया, बेइंदिया विसेसाहिया, एगिंदिया अनंतगुणा, एवं अपज्जत्तगाणंसव्वत्थोवा पंचेंदिया अपज्जत्तगा, चउरिंदिया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, तेइंदिया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, बेइंदिया अपज्जत्तगा विसेसाहिया, एगिदिया अपज्जत्तगा अनंतगुणा, सव्वत्थोवा चतुरिंदिया पज्जत्तगा, पंचेंदियापज्जत्तगा विसेसाहिया, बेइंदियापज्जत्तगा विसेसाहिया, तेइंदियापज्जत्तगा विसेसाहिया, एगिंदिया पज्जत्तगा अनंतगुणा, एतेसि णं भंते एगिदियाणं पज्जत्तआपज्जत्तगामं कयरे कयरेहितो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा एगिंदिया अपज्जत्तग, एगिंदिया पज्जत्तगा संखेज्जगुणा, एतेसि णं भंते बेइंदियाणं पज्जत्ताअपज्जत्तगाणं अप्पाबहुं गोयमा सव्वत्थोवा बेइंदिया पज्जत्तगा अपज्जत्तगा असंखेज्जगणा एवं तेइंदिय-चरिंदिय-पंचिंदिय वि, एतेसि णं भंते एगिदियाणं जाव पंचिंदियाणं य पज्जत्तगाण य अपज्जत्तगाण य कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवा चउरिंदिया पज्जत्तगा, पंचिंदियापज्जत्तगा विसेसाहिया, बेइंदिया-पज्जत्तगा विसेसाहिया, तेइंदियापज्जत्तगा विसेसाहिया, पंचिंदियाअपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा, चरिंदियाअपज्जत्ता विसेसाहिया, तेइंदिया अपज्जत्ता विसेसाहिया, वेइंदिया अपज्जत्ता विसेसाहिया, एगिदियाअपज्जता अनंतगुणा, एगिदिया पज्जत्ता संखेज्जगुणा सेत्तं पंचविधा संसारसमावण्णगा जीवा । • मुनि दीपरत्नसागरेण संशोधिताः सम्पादिताश्च चउत्थी पडिवत्ति समत्ता • ॥ पंचमी पडिवत्ती-(छव्विह पडिवत्ती) । दीपरत्नसागर संशोधितः] [130] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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