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________________ पोग्गलपरिणामे पन्नत्ते तं जहा- सोतिंदियविसए जाव फासिंदियविसए सोतिंदियविसए णं भंते पोग्गलपरि-णामे कतिविहे पन्नत्ते गोयमा दुविहे पन्नत्ते तं जहा- सुब्भिसद्दपरिणामे य दुब्भिसद्दपरिणामे य चक्खिंदि-यपुच्छा गोयमा दुविहे पन्नत्ते तं जहा- सुरूवपरिणामे य दुरूवपरिणामे य घाणिंदयपुच्छा गोयमा दुविहे पन्नत्ते तं जहा- सुब्भिगंधपरिणामे य दुब्भिगंधपरिणामे य, रसपरिणामे दुविहे पन्नत्ते तं जहा- सुरसपरिणामे य दुरसपरिणामे य फासपरिणामे दुविह पन्नत्ते तं जहा- सुफासपरिणामे य दुफासपरिणामे य से नूणं भंत उच्चावएसु सद्दपरिणामेसु उच्चावएसु रूवपरिणामेसु एवं गंधपरिणामेसु रसपरिणामेसु फासपरिणामेसु परिणममाणा पोग्गला परिणमंतीति वत्तव्वं सिया हंता गोयमा उच्चावेसु सद्दपरिणामेसु परिणममाणा पोग्गला परिणमंतित्ति वत्तव्वं सिया से नूणं भंते सुब्भिसद्दा पोग्गला दुब्भिसद्दत्ताए परिणमंति दुब्भिसद्दा पोग्गला सुब्भिसद्दत्ताए परिणमंति हंता गोयमा सुब्भिसद्दा पोग्गला दुब्भिसद्दत्तए परिणमंति दुब्भिसद्दापोग्गला सुब्भिसद्दत्ताए परिणमंति से नूणं भंते सुरूवा पोग्गला दूरूवत्ताए परिणमंति दुरूवा पोग्गला सुरूवत्ताए परिणमंति हंता गेयमा एवं सुब्भिगंधा पोग्गला दुब्भिगंधत्ताए परिणमंति दुब्भिगंधा पोग्गला सुब्भिगंधत्ताए परिणमंति हंता गोयमा एवं सुरसा दूरसत्ताए हंता गोयमा एवं सुफासा सुफासत्ताए हंता गोयमा । • तच्चाए पडिवत्तीए इंदिय विसयाधिकारो समत्तो . । देवाधिकारो । [३०७] देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे पुव्वामेव पोग्गलं खिवित्ता पभू तमेव अनुपरियट्टित्ताणं गिण्हित्तए हंता पभू से केणटेणं भंते एवं वुच्चति-देवे णं महिड्ढीए जाव महाणुभागे पुव्वामेव पोग्गलं खिवित्ता पभू तमेव अनुपरियट्टित्ताणं गिण्हित्तए गोयमा पोग्गले णं खित्ते समाणे पव्वामेव सिग्घगती भवति तओ पच्छा मंदगती भवति देवे णं पव्वंपि पच्छावि सीहे सीहगती चेव तरिए तुरियगती चेव से तेणटेणं गोयमा एवं वुच्चति-देवे णं महिड्ढीए जाव महाणुभागे पुव्वामेव पोग्गलं खिवित्ता पभू तमेव अनुपरियट्टित्ताणं गेण्हित्तए देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बहिरए पोग्गले अपरियाइत्ता बालं अच्छेत्ता अभेत्ता पभू गढित्तए नो इणढे समढे देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले अपरियाइत्ता बालं छेत्ता भेत्ता पभू गढित्तए नो इणढे समढे देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले परियाइत्ता बालं अच्छेत्ता अभेत्ता पभू गढित्तए नो इणढे समढे देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले परहियाइत्ता बालं छेत्ता भेत्ता पभू गढित्तए हंतापभू तं चेव णं गंठि छउमत्थे मणूसे णं जाणति न पासति एसुहमं च णं गढेज्जा देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले अपरियाइत्ता बालं अच्छेत्ता अभेत्ता पभू दीहीकरित्तए वा ह्रस्सीकरित्तए वा नो इणढे समढे [देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणभागे बाहिरए पोग्गले अपरियाइत्ता बालं छेत्ता भेत्ता पभू दीहीकरित्तए वा हस्सी करित्तए वा नो इणडे समढे देवे णं भंते महिट्ठीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले परियाइत्ता बालं अच्छेत्ता अभेत्ता पभू दीहीकरित्तए वा हस्सी करित्तए वा नो इणढे समढे देवे णं भंते महिड्ढीए जाव महाणुभागे बाहिरए पोग्गले परियाइत्ता बालं छेत्ता भेत्ता पभू दीहीकरित्तए वा हस्सीकरित्तए वा हंता पभू] तं चेव णं गठिं छउमत्थे मणूसे ने जाणति न पासति एसुहमं च णं दीहीकरेज्ज वा [हृस्सीकरेज्जवा] । पडिवत्ति-३ दीपरत्नसागर संशोधितः] [118] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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