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________________ [३०१] केवइया णं भंते जंबुद्दीवा दीवा नामधेज्जेहिं पन्नत्ता गोयमा असंखेज्जा जंबुद्दीवा नामधेज्जेहिं पन्नत्ता केवतिया णं भंते लवणसमुद्दा समुद्दा पन्नत्ता गोयमा असंखेज्जा लवणसमुद्दा नामधेज्जेहिं पन्नत्ता एवं धायतिसंडावि एवं जाव असंखेज्जा सूरदीवा नामधेज्जेहि य एगे देवे दीवे पन्नत्ते एगे देवोदे समुद्दे पन्नत्ते एगं नागे जक्खे भूते जाव एगे सयंभूरमणे दीवे एगे सयंभूरमणसमुद्दे नामधेज्जेणं पन्नत्ते । [३०२] लवणस्स णं भंते समुदस्स उदए केरिसए आसादेणं पन्नत्ते गोयमा खारे कडुए जाव नन्नत्थ तज्जोणियाणं सत्ताणं कालोयस्स णं पुच्छा गोयमा आसले मासले जाव पगतीए उदगरसे णं पन्नत्ते पुक्खरोदस्स णं पुच्छा गोयमा पुक्खरोदस्स उदए अच्छे पत्थे जाव पगतीए उदगरसे णं पन्नत्ते वरुणोदसस्स णं भंते समुद्दस्स केरिसए अस्सादे णं पन्नत्ते गोयमा से जहानामए चंदप्पभाति वा जहा हेट्ठा, खीरोदस्स णं पुच्छा गोयमा से जहानामए रण्णो चाउरंतचक्कवट्टिस्स चाउरक्के गोक्खीरे जाव एतो इतराए, घयोदस्स णं पुच्छा गोयमा जहानामते सारइयस्स गोघयवरस्स मंडे जाव एत्तो मणा-मतराए चेव आसादे णं पन्नत्ते खोतोदस्स णं भंते समुद्दस्स उदए केरिसए आसाए णं पन्नत्ते गोयमा से जहानामए उच्छृणं जाव एत्तो इतृतराए जहा खोतो तहा सेसा वि सयंभुरममस्स जहा पुक्खरोदस्स कति णं भंते समुद्दा पत्तेयरसा पन्नत्ता गोयमा चत्तारि समुद्दा पत्तेयरसा पन्नत्ता तं जहा- लवणे वरुणोदे खीरोदे घयोदे कति णं भंते समुद्दा पगतीए उदरगसा पन्नत्ता गोयमा तओ समुद्दा पन्नत्ता तं जहाकालोए पुक्खरोदे सयंभुरमणे अवसेसा समुद्दा उस्सण्णं खोतरसा पन्नत्ता समणउसो । ___ [३०३] कति णं भंते समुद्दा बहुमच्छकच्छभाइण्णा पन्नत्ता गोयमा तओ समुद्दा पन्नत्ता तं जहा- लवणे कालोए सयंभुरमणे अवसेसा समुद्दा अप्पमच्छकच्छभाइण्णा नो च्चेव णं निम्मच्छकच्चभा पन्नत्ता समणाउसो लवणे णं भंते समुद्दे कति मच्छजातिकुलकोडिजोणी-पमुहसयसहस्सा पन्नत्ता गोयमा सत्त मच्छजाति जाव पन्नत्ता कालोए णं नव, सयंभुरमणे पुच्छा अद्धतेरस मच्छजाति जाव पन्नत्ता लवणे णं भंते समुद्दे मच्छाणं केमहालिया सरीरोगाहणा पन्नत्ता गोयमा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जतिभागं उक्कोसेणं पंच जोयणसयिं कालोए णं सत्त जोयणसताई सयंभूरमणे जोयणसहस्सं [दस जोयणसत्ताई पा.] [३०४] केवतिया णं भंते दीवसमुद्दा नामधेज्जेहिं पन्नत्ता गोयमा जावतिया लोगे सुभा नामा सुभा वण्णा सुभा गंधा सुभा रसा सुभा फासा एवतिया दीवसमुद्दा नामधेज्जेहिं पन्नत्ता केवतिया णं भंते दीवसमुद्दा उद्धारेणं पन्नत्ता गोयमा जावतिया अड्ढाइज्जाणं उद्धारसागरोवमाणं उद्धारसमया एवतिया दीवसमुद्दा उद्धारेणं पन्नत्ता । [३०५] दीवसमुद्दा णं भंते किं पुढविरपरिणामा आउपरिणामा जीवररिणामा पोग्गलपरिणामा गोयमा पुढविपरिणामावि आउपरिणामावि जीवपरिणामावि पोग्गल परिणामावि दीवसमुद्देसु णं भंते सव्वापाणा सव्वभूया सव्वजीवा सव्वसत्ता उववण्णपुव्वा हंता गोयमा असई अदुवा अनंतखुत्तो । ० तच्चाए पडिवत्तीए दीव-समुद्राधिकारो समत्तो . ॥ इंदियविसयाधिगारो । [३०६] कतिविहे णं भंते इंदियविसए पोग्गलपरिणामे पन्नत्ते गोयमा पंचविहे इंदियविसए पडिवत्ति-३ दीपरत्नसागर संशोधितः] [117] [117] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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