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________________ साउयवज्जेसु मणुस्सेसु ठिती जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं पुव्वकोडी मारणंतियसमुग्धाएणं दुविहावि मरंति अनंतरं उव्वट्टित्ता कहिं नेरइएसुवि तिरिक्खजोणिएसुवि मणुस्सेसुवि देवेसुवि नेरइएसु रयणप्पहाए सेसेसु पडिसेहो तिरिएसु सव्वेसु उववज्जंति संखेज्जवासाउएसुवि असंखेज्जवासाउएसुवि चउप्पएसु पक्खीसुवि मणुस्सेसु सव्वेसु कम्मभूमिएसु नो अकम्मभूमिएसु अंतरदीवएसुवि संखेज्जवासाउएसुवि असंखेज्जवासाउएसुवि पज्जत्तएसुवि अपज्जत्तएसुवि देवेसु जाव वाणमंतरा चउगइया दुआगइया परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता से तं जलयर-समुच्छिपंचेंदिय-तिरिक्खजोणिया । [४४] से किं तं थलयरसमुच्छिम पंचेंदियतिरिक्खजोणिया थलयरसमुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पन्नत्ता तं जहा- चउप्पयथलयरसमुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणिया परिसप्पसंमच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं चउप्पयथलयरसमुच्छिमपंचेंदियतिर्खजोणिया चउप्पयथलयरसमुच्छिमपेंचेदियतिरिक्खजोणिया चउव्विहा पन्नत्ता तं जहा- एगखुरा दुखुरा गंडीपया सणप्फया जाव जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य तओ सरीरगा ओगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स असंखेज्जइभागं उक्कोसेणं गाउयपुहत्तं ठिती जहन्नेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं चउरासीइपडिवत्ति-१ वाससहस्साइं सेसं जहा- जलयराणं जाव चउगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता सेत्तं चउप्पय-थलयरसमुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं थलयरपरिसप्पसंमुच्छिमा थलयरपरिसप्पसंमुच्छिमा दुविहा पन्नत्ता तं जहा- उरपरिसप्प-समुच्छिमा भुयपरिसप्पसंमुच्छिमा से किं तं उरपरिसप्पसंमुच्छिमा उरपरिसप्पसंमुच्छिमा चउव्विहा पन्नत्ता तं जहा- अही अयगरा आसालिया महोरगा से किं तं अही, अही दुविहा पन्नत्ता तं जहा- दव्वीकरा य मउलिणो य से किं तं दव्वीकरा दव्वीकरा अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- आसिविसा जाव सेत्तं दव्वीकरा से किं तं मउलिणो मउलिणो भनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- दिव्वा गोणसा जाव से तं मउलिणो सेत्तं अही से किं तं अयगरा अयगरा एगागारा पन्नत्ता से तं अयगरा से किं तं आसालिया आसालिया जहा- पन्नवणाए | से किं तं महोरगा [महोरगा जहा- पन्नवणाए से तं महोरगा] जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य तं चेव नवरि-सरीरोगाहप अंगुलस्स असंखेज्जइभागं उक्कोसेणं जोयणपुहत्तं ठिती जहन्नेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं तेवण्णं वाससहस्साइं सेसं जहा- जलयराणं जाव चउगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा से तं उरपरिसप्पा से किं तं भुययरिसप्प-समुच्छिमथलयरा भयपरिसप्पसंमच्छिमथलयरा अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- गोहा नउला जाव जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पज्जत्तगा य अपज्जत्तगा य सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स असंखेज्जइभागं उक्कोसेणं धणुपुहत्तं ठिती उक्कोसेणं बाया-लीसं वाससहस्साई सेसं जहा- जलयराणं जाव चउगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा पन्नत्ता से तं भयपरिसप्पसमुच्छिमा से तं थलयरा, से किं तं खहयरा खहयरा चउव्विहा पन्नत्त तं जहा-चम्म-पक्खी लोमपक्खी समग्गपक्खी विततपक्खी से किं तं चम्मपक्खी चम्मपक्खी अनेगविहा पन्नत्त तं जहावग्गली जाव जे यावण्णे तहप्रपगारा से तं चम्मपक्खी, से किं तं लोमपक्खी लोमपक्खी अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा- ढंका जाव जे यावण्णे तहप्पगारा से तं लोमपक्खी, से किं तं समुग्गपक्खी समुग्गपक्खी एगागारा पन्नत्ता जहा- पन्नवणाए एवं विततपक्खी जाव जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दीपरत्नसागर संशोधितः] [10] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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