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________________ नव य सया पन्नासा तारागणकोडिकोडीणं ।। [२३४] सोभं सोभिंसु वा सोभंति वा सोभिस्संति वा । [२३५] कालोयं णं समुदं पुक्खरवरे नाम दीवे वट्टे वलयागारसंठाणसंठिते सव्वतो समंता संपरिक्खित्ताणं चिट्ठति पुक्खरवरे णं दीवे किं समचक्कवालसंठिते विसमचक्कवालसंठिते गोयमा समचक्कवालसंठिते नो विसमचक्कवालसंठिते पुक्खरवरे णं भंते दीवे केवतियं चक्कवालविक्खंभेणं केवतियं परिक्खेवेणं पन्नत्ते गोयमा सोलस जोयणसतसहस्साई चक्कवलविक्खंभेणं [एगा जोयणकोडी-बाउणति च सयसहस्साइं अउणानउति च सहस्सा अट्ठ य सया चउनउया परिक्खेवेणं पन्नत्ते] [२३६] एगा जोयणकोडी बाणउंति खलु भवे सयसहस्सा । अट्ठ सया चउणउया परीरओ पुक्खरवरस्स ।। ___ [२३७] से णं एगे पउमवरवेदियाए एगेणं य वनसंडेणं सव्व ओसमंता संपरिक्खित्ते दोण्हवि वण्णओ, पुक्खरवरस्स णं भंते दीवस्स कति दारा पन्नत्ता गोयमा चत्तारि दारा पन्नत्ता तं जहा-विजए वेजयंते जयंते अपराजिते कहि णं भंते पुक्खरवरस्स दीवस्स विजए नामं दारे पन्नत्ते गोयमा पुक्खरवरदीवपुरत्थिमपेरंते पुक्खरोदसमुद्दपुरत्थिमद्धस्स पच्चत्थिमेणं एत्थ णं पुक्खरवर-दीवस्स विजए नामं दारे पन्नत्ते तं चेव सव्वं एवं चत्तारिविदारा पुक्खरवरस्स णं भंते दीवस्स दारस्स य दारस्स य एस णं केवतियं अबाधाए अंतरे पन्नत्ते गोयमा अडतालीसं जोयणसयसहस्साई बावीसं च सहस्साई चत्तारिय अकुणत्तरे जोयणसते दारस्स य दारस्स य अबाहाए अंतरे पन्नत्ते । [२३८] अडयाल सयसहस्सा बावीसं खल भवे सहस्साइं । अगुणत्तरा य चउरो दारंतर पुक्खरवरस्स ।।। [२३९] पदेसा दोण्हवि पुट्ठा जीवा दोसुवि भाणियव्वा, से केणटेणं भंते एव वुच्चतिपुक्खरवरदीवे-पुक्खरवरदीवे गोयमा पुक्खरवरे णं दीवे तत्थ-तत्थ देसे तहि-तहिं पदेसे बहवे परमरुक्खा परमवणा पउमसंडा निच्चं कुसुमिया जाव वडेंसगधरा पउम-महापउमरुक्खेसु एत्थ णं परम-पुंडरीया नामं दो देवा महिड्ढिया जाव पलिओवद्वितीया परिवसंति से तेणद्वेमं गोयमा एवं वुच्चति-पुक्खरवरदीवे पडिवत्ति -३ जाव निच्चे, पुक्खरवरे णं भंते दीवे केवइया चंदा पभासिंसु वा एवं पुच्छा । [२४०] चोयालं चंदसयं चउयालं चेव सूरियाणं सयं । पुक्खरवरदीवंमि चरंति ते पभासेंता ।। [२४१] चत्तारि सहस्साई बत्तीसं चेव होति नक्खत्ता । छत्त सया बावत्तर महग्गया बारस सहस्सा ।। [२४२] छण्णउइ सयसहस्सा चत्तालीसं भवे सहस्साई । चत्तारि सया पुक्खरवरे उ तारागणकोडकोडीणं ।। [२४३] सोभं सोभिंसु वा सोभंति वा सोभिंस्संति वा, पुक्खरवरदीवस्स णं बहुमज्झदेसभाए एत्थ ण माणुसुत्तरे नाम पव्वते पन्नत्ते वट्टे वलयागारसंठाणसंठिते जो णं पुक्खरवरं दीवं दुहा विभयमाणे-विभयमाणे चिट्ठति तं जहा- अब्भितरपुक्खरद्धं च बाहिरपुक्खरद्धं च अभिंतरपुक्खरद्धे णं भंते केवतियं चक्कवालविक्खंभेणं केवतियं परिक्खेवेणं पन्नत्ते गोयमा अट्ठ जोयणसयसहसाई चक्कवालविक्खंभेणं । दीपरत्नसागर संशोधितः] [104] [१४-जीवाजीवाभिगम]
SR No.003727
Book TitleAgam 14 Jivajivabhigam Taiam Uvvangsuttam Mulam PDF File Without Correction
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherDeepratnasagar
Publication Year2012
Total Pages152
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Agam 14, & agam_jivajivabhigam
File Size3 MB
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