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________________ . ( ए१ ) पहरनी दाढा, अलवें लागी मारे होराज ॥ कन्या रूपें वैरणी, थइ लागी उपरांठी, वैर विरोध वधारे होराज ॥ २ ॥ एवकुं तुज किणें सीखव्युं, चरित्र विषम प्रति कुं, मुंकुं सुणतां लागे होराज ॥ आज थकी जो इंम करे, वधती वधती वली शुं, कर शे जातां आगे होराज ॥ ३ ॥ दोष नहीं माहरे शि रें, कीधुं बे तें जेहवं, तेवां फल तुं चाखे होराज ॥ प्र त्यक्ष विषनी वेलमी, उखेमी हवे नाखी, सारसुं तुज पाखें होराज ॥ ४ ॥ तात वचन करुया सुणी, मा यरीसाणी जाणी, आई निज यावासें दोराज ॥ बे ठी श्रमण मणी, करीनें मुख नीचुं, मनमां एम वि मासे दोराज ॥ ५ अणगमतुं में तातनुं, विकल प सुं की धुं, जेहथी तात री साणो होराज ॥ हार रयण खोया थकी, एवको कोप किवारें, राजा मनमां नाणे दोराज ॥ ६ ॥ स्यो अवगुण नृप माहरो देखीने क लुषाणो, बोल्यो विरुयां वयणा होराज ॥ इमं कुमरी चिंता जरी, मुखपंकज करमाणी, वरसे यासुं नयणा होराज ॥ ७ ॥ नृप कहे पटराणी प्रत्यें, तुज तनुजानां दीगं, चरित्र महाविष तोले होराज ॥ हार रयण लिए कुमरनें, दीघोडे निश्चें, मुज माराने कोलें होरा Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003682
Book TitleMahabal Malayasundarino Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1907
Total Pages324
LanguageGujarati
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
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