SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 78
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( जय ) ॥ ढाल त्रीजी ॥ उनी जावलदे राणी अरज करेबे, अबको वरसालो घर कीजें हो ॥ गढबुंदी वाला || ए देशी ॥ ॥ मलया कड़े विरहानल तापी, अवसर एड् र ह्यानो हो । प्रभु धरा हो लोजी, वाला चलणं न देस्यां ॥ चलण तुमारो मोहन मरण हमारो, रहो र दो कं मानो हो || प्र० ॥ १ ॥ करुणा करीने मुज उपर विजी, पूरो मनोरथ रूमा हो ॥ प्र० ॥ लक्ष्मी पूंज मुत्ताहल मनजुं, एह ल्यो चातुर सूमा हो ॥ प्र० ॥ २ ॥ हार तो मिसे ए वरमाला, कंठे ववी म जाणो हो ॥ प्र० ॥ दवणादी गांधर्व विवाहें, परणी मुज सुख माणो हो ॥ प्र० ॥ ३ ॥ कुमर कदे सु चंद्र मुखी तें, वचन कह्युं ते वारू हो ॥ प्र० ॥ मात पिता आणा विण कन्या, वरवी नहीं विवहारू हो ॥ प्र० ॥ ४ ॥ दुःख म धरिस रही दिन केताइक, बुद्धि करुं हुं तेहवी हो ॥ प्र० ॥ मात पिता जन जोते तु जनें, देसे मुज ततखेवी हो ॥ प्र० || २ || पण बांध्यो ए में तुज आगें, मन रली आयत कीजें हो ॥ प्र० ॥ ढील दुवे जावाने तेहथी, सीखमी सी दवे दीजें हो ॥ प्र० ॥ ६ ॥ कनकवती नीचें नृपराणी, वातसुणे र Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003682
Book TitleMahabal Malayasundarino Ras
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Bhimsinh Manek
PublisherShravak Bhimsinh Manek
Publication Year1907
Total Pages324
LanguageGujarati
ClassificationBook_Devnagari
File Size12 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy