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________________ (२९) संघी ) ये पांच जैनाभास बतलाये गये हैं। पुन्नाटसंघ भी नन्दिसंघकी शाखा अपने पिछले कई लेखोंमें मैंने यह अनुमान किया था कि पन्नाटसंघ द्राविडसंघका ही नामान्तर होगा * क्योंकि पुन्नाट कर्नाट या कर्नाटक देशको कहते हैं और द्रमिल या द्रविड़ उससे लगे हुए देशको; परन्तु अब ऐसा जान पड़ता है कि नन्दिसंघकी देशभेदके कारण बनी हुई एक शाखा द्रविड-संघ थी, उसी प्रकार पुन्नाटसंघ भी रही होगी जिसमें हरिवंशपुराणके कर्ता जिनसेन हुए हैं। पुन्नाट शब्दका एक अर्थ पुन्नाग या नागकेसर वृक्ष भी होता है - । कर्नाटक प्रान्तमें इस समय भी नागकेसर कसरतसे होती है और जान पड़ता है, इन्हीं वृक्षोंकी बहुलताके कारण उक्त देशका नाम पुन्नाट प्रसिद्ध हुआ होगा । इसपरसे यदि हम यह अनुमान करें कि पूर्वकालीन पुन्नागवृक्ष * देखो जैनहितैषी भाग १३ अंक ५-६ में 'दर्शनसार विवेचना' शीर्षक लेख और जनहितैषी भाग १४ अंक ४-५ में 'वनवासी और चैत्यवासी सम्प्रदाय' शीर्षक लेख । x देखो प्रो० एल० आर० वैद्य, बी० ए०, एलएल० बी० की 'दि स्टेण्डर्ड-संस्कृत-इंग्लिश डिक्शनरी' पृष्ठ ४४१ । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003657
Book TitleHarivanshpuranam Purvarddham
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDarbarilal Nyayatirth
PublisherManikchand Digambar Jain Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages450
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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