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________________ परिशिष्ट ३: कथा २११ ३. तिल का दृष्टान्त' एक बार राजा ने तिलों की कुछ गाड़ियां नटों के गांव में भेजी और तिलों की संख्या बताने का आदेश दिया। गांववालों के समक्ष समस्या हो गई कि इतने तिलों की गिनती कैसे की जाए? उन्होंने रोहक को बुलाया। उससे समाधान प्राप्त कर वे राजा के पास गए और बोले-स्वामिन् ! हम ग्रामीण लोग गणित नहीं जानते फिर भी सामान्य ज्ञान के आधार पर इतना बता सकते हैं कि आकाश में जितने तारे हैं उतने ही तिल हैं। आप किसी गणितज्ञ राजपुरुष द्वारा तिलों और तारों की संख्या करवा लीजिए। यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ। मलयगिरि द्वारा स्वीकृत पाठ में तिल का उल्लेख नहीं है इसलिए यह मलयगिरि वृत्ति में निर्दिष्ट कथाओं में अनुपलब्ध है। हस्तलिखित आदर्शों में तिल पाठ मिलता है। आवश्यक नियुक्ति में वह पाठ उपलब्ध है। आवश्यक चूर्णि और वृत्ति में वह व्याख्यात है। हारिभद्रीया वृत्ति के टिप्पणक में तिल की कथा का उल्लेख संक्षेप में किया गया है और वह प्रस्तुत कथा से भिन्न है । तिलसमं तेल्लं दायब्वं ति तिला अदाएण मिया । ४. बालुका दृष्टान्त' ___एक बार राजा ने ग्रामवासी नटों को आदेश दिया-तुम्हारे गांव के चारों ओर अत्यन्त रमणीय बालू रेत है। उसकी कुछ मोटी रस्सियां बनाकर शीघ्र भेजिए । राजा का आदेश प्राप्त कर सभी ग्रामवासी एकत्र हुए। रोहक को बुलाया गया-रोहक ने गांव वालों को समझा दिया। वे राजा के पास पहुंचकर बोले- स्वामिन् ! हम तो नट हैं। हम नाचना जानते हैं, पर रस्सी बनाना नहीं जानते । आपका आदेश हम अवश्य पालन करेंगे। आपके राज्य में बहुत सी प्राचीन रस्सियां होंगी। कृपाकर आप हमें नमूने के तौर पर एक बालू की रस्सी दे दीजिए। उसे देखकर हम दूसरी रस्सियां बनाकर आप तक पहुंचा देंगे। रोहक की औत्पत्तिकी बुद्धि से समाधान प्राप्त कर राजा ने उन्हें आदेश से मुक्त कर दिया। ५. हायी दृष्टान्त' एक बार राजा ने एक बूढा, रोगग्रस्त एवं मरणासन्न हाथी भेजा और ग्रामवासियों को आदेश दिया-हाथी की स्थिति से मुझे प्रतिदिन अवगत कराना, पर उसकी मृत्यु की सूचना कभी मत देना । सारे ग्रामवासी मिले। उन्होंने रोहक को बुलाया। रोहक ने कहा-अभी हाथी को चारा दो। फिर जो होगा, देखेंगे। ग्रामवासियों ने चारा दे दिया। रात्रि में हाथी की मृत्यु हो गई । गांववासी घबरा गए। उन्होंने रोहक से समस्या का समाधान पूछा। उसने उपाय बता दिया। ग्रामवासी राजा के पास जाकर बोलेस्वामिन् ! आज हाथी न उठता है. न बैठता है, न खाता है, न पीता है और न श्वास लेता है और तो क्या, वह कोई चेष्टा भी नहीं करता। राजा ने पूछा-तो क्या वह मर गया है ? 'स्वामिन् ! ऐसा तो आप ही कह सकते हैं, हम नहीं।' राजा मौन हो गया। ६. कूप दृष्टान्त' राजा ने आदेश पत्र भेजा तुम्हारे गांव में एक कुंआ है। उसका जल बहुत मीठा है। उसे यहां ले आओ। यह आदेश प्राप्त कर ग्राम के सब मुखिया इकट्ठे हुए और उन्होंने रोहक से पूछा। उसने युक्ति सुझाई । वह युक्तिपत्र लेकर दूत राजा के पास १. (क) आवश्यकचूणि, पृ. ५४५ ३. (क) आवश्यकचूणि, पृ. ५४५ (ख) आवश्यक नियुक्ति हारिभद्रीया वृत्ति, पृ. २७८ (ख) आवश्यकनियुक्ति हारिभद्रीया वृत्ति, पृ. २७८ (ग) आवश्यक नियुक्ति मलयगिरीया वृत्ति, प. ५१७ (ग) आवश्यकनियुक्ति मलयगिरीया वृत्ति, प. ५१७,५१८ (घ) नन्दी हारिभद्रीया वृत्ति टिप्पणकम, पृ. १३३ (घ) नन्दी मलयगिरीया वृत्ति, प. १४७ (च) आवश्यकनियुक्ति दीपिका, प. १७८ (च) नन्दी हारिभद्रीया वृत्ति टिप्पणकम्, पृ. १३३ २. (क) आवश्यकचूणि, पृ. ५४५ (छ) आवश्यकनियुक्ति दीपिका, प. १७८ (ख) आवश्यक नियुक्ति हारिभद्रीया वृत्ति, पृ. २७८ ४. (क) आवश्यकचूणि, पृ. ५४५ (ग) आवश्यक नियुक्ति मलयगिरीया वृत्ति, प. ५१७ (ख) आवश्यकनियुक्ति हारिभद्रीया वृत्ति, पृ. २७८ (घ) नन्दी मलयगिरीया वृत्ति, प. १४७ (ग) आवश्यकनियुक्ति मलयगिरीया वृत्ति, प. ५१८ (घ) नन्दी हारिभद्रीया वृत्ति टिप्पणकम्, पृ. १३३ (घ) नन्दी मलयगिरीया वृत्ति, प. १४७,१४८ (छ) आवश्यकनियुक्ति दीपिका, प. १७८ (च) नन्दी हारिभद्रीया वृत्ति टिप्पणकम्, पृ. १३३ (छ) आवश्यकनियुक्ति दीपिका, प. १७८ Jain Education Intemational For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003616
Book TitleAgam 31 Chulika 01 Nandi Sutra Nandi Terapanth
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Acharya, Mahapragna Acharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1997
Total Pages282
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_nandisutra
File Size9 MB
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