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________________ २०८ पुट-पुप्फग पुट्ठ (पुष्ट) उ० ७।२ पुटुसेणियापरिकम्म (पृष्टश्रेणिकापरिकर्मन) नं० ६३,६६ पुट्ठापुट्ठ (पृष्टापृष्ट) नं० १०२ पुट्ठावत्त (पृष्टावर्त) नं०६६ पुडभेयण (पुटभेदन) क० १६ पुढवि (पृथ्वी) नि० ७।६८ से ७२; १३।१ से ५; १४१२० से २४; १६॥३४, ४१ से ४५; १७।१२८; १८१५२ से ६६ पुढविकाइय (पृथिवीकायिक) द० ४ सू० ३. अ० २५४,२७५,४४५,४५०,४५३,४७२,४७५. ४७६, ४७८ से ४८० पुढविकाय (पृथिवीकाय) आ० ४१८ द०६।२६ से २८ पुढविक्काय (पृथिवीकाय) उ० १०१५ पुढविजीव (पृथिवीजीव) द० ५।६८ पुढविशिला (पृथ्वीशिला) दसा० ७.१३ से १५ पुढवी (पृथिवी) द० ४ सू० ४,१८; ८१२,४; १०१२,४,१३. उ० ६।३६; २६।३०; ३५।११; ३६।५७, ६०,६६,७०,७३,७७. ८० से ८२, १५६. नं० २५. अ० १८५,२५४, ४०३, ४१०. दसा० २।३; ७।२१ पुढवीकाय (पृथिवीकाय) नि० १२१८; १४।३१ १८१६३ पुढवीसमाणवण्णय (पृथ्वीसमानवर्णक) प० २६६ पुढवीसिलापट्टय (पृथ्वीशिलापट्टक) दसा० ५।६ पुढो (पृथग्) द० ४ सू० ४. उ० ३।२ पुण (पुनर्) द० ४ सू० ६. उ० ३३९. नं० गा० २०. जोनं० २. अ० ३. दसा० ५।७।१५. प० १४. क० २११. व०६।६. नि०६।१२ पुणब्भव (पुनर्भव) द० ८।३६ पुणरागमणिज्ज (पुनरागमनीय) दसा० १०॥३२ पुणव्वसु (पुनर्वसु) अ० ३४१ पुणो (पुनर्) उ० १११२. दसा० ६।२।६. व० २३. नि० ४।२२ पुण्ण (पुण्य) द० ४।१५,१६; २४६; १०११८; चू० १. सू० १. उ० १२।१२, १३।१०,११, २०,२१; १८७; २१।२४,२८।१४,१७ पुण्ण (पूर्ण) द० ७।३८. उ० ११॥३१; १२११३; २०।२८. अ० ३०७१६,५३१. दसा० १०।२८ से ३२. प० २६. नि० १८१८ पुण्णकलस (पूर्णकलश) दसा० १०।१४. प० २६ पुण्णचंद (पूर्णचन्द्र) प० २४,२६ पुण्णपत्तिया (पुण्णपत्तिया) प० १६७ पुण्णपय (पुण्यपद) उ० १८।३४ पुण्णभद्द (पूर्णमद्र) दसा० ६।१; १०।१५. प० १६१ पुण्णमासी (पौर्णमासी) उ० ११।२५. दसा०६।१० से १८ पुण्णाग (पुन्नाग) प० २५ पुण्णिमा (पूर्णिमा) व० १०१५ पुत्त (पुत्र) द० ७।१८; चू० ११७. उ० ११३६; ६।३; ६।२,१५,१३।२५; १४१६,१२,२६,३०, ३६,१८।१५,३७,४६,१६२,१६,२४,३४, ३५,३८,७५,८४,८५,८७,६७; २०१२५; २२।२,४. नं० ३८१३. अ० ३०२,५२०. प० १६५. क० ४।१०. व० ७२५ पुत्तग (पुत्रक) उ० १४१५ पुत्तत्त (पुत्रत्व) दसा० १०।२४,२७,३० पुत्तलाभ (पुत्रलाभ) प० ६,३८,४७ पुत्तिया (पुत्रिका) अ० ३१७ पुन्न (पुण्य) दचू० २।१ पुन्नागषण (पुन्नागवन) अ० ३२४ पुप्फ (पुष्प) द० १।२ से ४; ५।२१,५७,११४, ११६८।१५; ६।१८. उ० ६।६; १२।३६; ३४६. अ० १६,२०,५२४. दसा० १०।१७. प० २०,४०,४६,४८,६१,६२,६४,६६,७५, २६२,२६७. नि० १४॥३४; १८१६६ पुप्फग (पुष्पक) प० ५,६,३६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003556
Book TitleNavsuttani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Acharya, Mahapragna Acharya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2000
Total Pages1316
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, & Canon
File Size29 MB
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