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________________ [263 प्रथम उद्देशक] 16. जे भिक्खू चाउम्मासियं वा, साइरेग-चाउम्मासियं वा, पंचमासियं वा, साइरेगपंचमासियं वा, एएसिं परिहारट्ठाणाणं अण्णयरं परिहारट्ठाणं पडिसेवित्ता पालोएज्जा, पलिउंचियं आलोएमाणे ठवणिज्ज ठवइत्ता करणिज्ज व्यावडियं / ठविए वि पडिसेवित्ता, से विकसिणे तत्थेव आरहेयम्वे सिया। 1. पुग्विं पडिसेवियं पुव्विं पालोइयं, 2. पुब्धि पडिसेवियं पच्छा पालोइयं, 3. पच्छा पडिसेवियं पुस्विं आलोइयं, 4. पच्छा पडिसेवियं पच्छा आलोइयं / 1. अपलिउंचिए अपलिचियं, 2. अपलिउंचिए पलिउंचियं, 3. पलिउंचिए अपलिउंचियं, 4. पलिउंचिए पलिउंचियं / पालोएमाणस्स सम्वमेयं सकयं साहणिय (आरुहेयब्वे सिया) जे एयाए पट्ठवणाए पविए निव्विसमाणे पडिसेवेइ, से विकसिणे तत्थेव आरहेयध्वे सिया। 17. जे भिक्खू बहुसो वि चाउम्मासियं वा, बहुसो वि साइरेग-चाउम्भासियं वा, बहुसो वि पंचमासियं वा, बहुसो वि साइरेग-पंचमासियं वा, एएसिं परिहारट्ठाणाणं अण्णयरं परिहारहाणं पडिसेवित्ता आलोएज्जा, अपलिउंचिय पालोएमाणे ठवणिज्ज ठवइत्ता करणि वेयावडियं / ठविए वि पडिसेवित्ता से वि कसिणे तत्थेव आरहेयटवे सिया। 1. पुट्विं पडिसेवियं पुब्बिं आलोइयं, 2. पुन्विं पडिसेवियं पच्छा आलोइयं, 3. पच्छा पडिसेवियं पुन्विं आलोइयं, 4, पच्छा पडिसेवियं पच्छा पालोइयं / 1. अपलिउंचिए अपलिउंचियं, 2. अपलिउंचिए पलिउंचियं, 3. पलिउंचिए अपलिउंचियं, 4. पलिउंचिए पलिउंचियं / भालोएमाणस्स सम्वमेयं सकयं साहणिय (प्रारुहेयब्वे सिया) जे एयाए पठ्ठवणाए पविए निव्वसमाणे पडिसेवेइ, से विकसिणे तत्थेव पारुहेयम्वे सिया। 18. जे भिक्खू बहुसो वि चाउम्मासियं वा, बहुसो वि साइरेग-चाउम्मासियं वा, बहुसो वि पंचमासियं वा, बहुसो वि साइरेग पंचमासियं वा, एएसि परिहारट्ठाणाणं अण्णयरं परिहारट्ठाणं पडिसेवित्ता आलोएज्जा, पलिउंचियं आलोएमाणे ठवणिज्ज ठवइत्ता करणिज्जं वेयावडियं / ठविए वि पडिसेबित्ता से वि कसिणे तत्थेव प्रारुहेयन्वे सिया। 1. पुग्विं पडिसेवियं पुश्विं आलोइयं, 2. पुग्विं पडिसेवियं पच्छा पासोइयं, 3. पच्छा पडिसेवियं पुग्विं आलोइयं, 4. पच्छा पडिसेवियं पच्छा पालोइयं / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003494
Book TitleAgam 26 Chhed 03 Vyavahara Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Trilokmuni, Devendramuni, Ratanmuni
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1982
Total Pages287
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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