________________ 290] [व्यवहारसूत्र रुग्ण भिक्षुओं को गण से निकालने का निषेध 6. परिहारकप्पट्ठियं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्ज बेयावडियं जाव तओ रोगायंकाओ विप्पमुक्को, तओ पच्छा तस्स अहालहुसए नाम ववहारे पट्टवियब्वे सिया। 7. अणवठ्ठप्पं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं बेयावडियं जाव तओ रोगयंकानो विप्पमुषको, तओ पच्छा तस्स अहालहुसए नामं बवहारे पट्टवियब्वे सिया। 8. पारंचियं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तओ रोगायंकाओ विष्पमुक्को, तमो पच्छा तस्स अहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियन्वे सिया। 9. खित्तचित्तं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तओ रोगायंकाओ विप्पमुक्को, तनो पच्छा तस्स प्रहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियन्वे सिया। 10. दित्तचित्तं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्ज वेयावडियं जाव तओ रोगायंकाओ विष्पमुक्को, तओ पच्छा तस्स अहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियब्वे सिया। 11. जक्खाइलै भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तो रोगायंकायो विप्पमुक्को, तओ पच्छा तस्स अहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियब्वे सिया। 12. उम्मायपत्तं भिक्ख गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जू हित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तओ रोगायंकायो विप्पमुक्को, तो पच्छा तस्स प्रहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियन्वे सिया। 13. उवसग्गपत्तं भिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निज्जूहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तओ रोगायंकाओ विष्पमुक्को, तो पच्छा तस्स प्रहालहुसए नाम ववहारे पट्टवियब्वे सिया। 14. साहिगरणंभिक्खु गिलायमाणं नो कप्पइ तस्स गणावच्छेइयस्स निहित्तए, अगिलाए तस्स करणिज्जं वेयावडियं जाव तओ रोगायंकायो विष्पमुक्को, तओ पच्छा तस्स प्रहालहुसए नामं ववहारे पट्टवियब्वे सिया। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org