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________________ अतुर्थ प्राभृत) [45 तोसे दुवे बाहाओ अणवद्विआओ' भवंति, सं जहा-- १.-सव्वभंतरिया चेव बाहा / २.--सव्वबाहिरिया चेव बाहा / प.--तत्थ को हेउ ति? वएज्जा। उ.-- ता अयण्णं जंबुद्दीने दोवे सम्वदीव-समुद्दाणं सम्वन्भंतराए, सव्वखुड्डाए। वट्टे तेल्लापूय-संठाण-संठिए / बट्टे रहचक्कवाल-संठाण-संठिए। वट्टे पुक्खरकणिया-संठाण-संठिए / वट्टे पडिपुण्णचंद-संठाण-संठिए / एग जोयणसयसहस्सं आयाम-विक्खंभेणं / तिष्णि जोयणसयसहस्साई सोलससहस्साई दोणि य सत्तावीसे जोयणसए, तिणि य कोसे, अट्ठावीसं च धणुसयं, तेरस अंगुलाई अद्धंगुलं च किंचि विसेसाहियं परिक्खेवेणं पण्णत्ते / तावक्खेतसंठिइए परिक्खेवो ता जया णं सूरिए सम्वन्भंतरं मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरति, तया णं उद्धीमुहकलंबुमापुष्फसंठिया तावक्खेत्तसंठिई प्राहिताति वएज्जा, अंतो संकुडा, बाहि वित्थडा, अंतो वट्टा, बाहिं पि थुला, अंतो अंकमुहसंठिया, बाहिं सस्थियमुहसंठिया, दुहओ पासेणं तोसे तहेव जाव सव्वबाहिरिया चेव बाहा। (क) तीसे णं सम्बन्भंतरिया बाहा = मंदरपब्वयं तेणं णव जोयणसहस्साई चत्तारि य छलसीए जोयणसए णव य दसभागे जोयणस्स परिक्खेवेणं आहिए त्ति वएज्जा। प.–ता से णं परिक्खेवविसेसे कओ ? आहिए त्ति वएज्जा ? उ.-ताजे णं मंदरस्स पव्वयस्स परिक्खेवे, तं परिक्खेवं तिहि गुणित्ता, दसहि छित्ता वसहि भागे होरमाणे = एस णं परिक्खेव-विसे से, आहिए ति वएज्जा। 1. 'द्वे च बाहे अनवस्थिते भवतः तद्यथा सर्वाभ्यन्तरा, सर्वबाह्या च / (क) तत्र या मेरुसमीपे विष्कम्भमधिकृत्य वाहा सा सर्वाभ्यन्तरा। (क) या तु लवणदिणि जम्बुद्वीपपर्यन्ते विष्कम्भमधिकृत्य बाहा सा सर्वबाह्यबाहा। . (ग) पायामश्च-दक्षिणायततया प्रतिपत्तव्यो, विष्कम्भः पूर्वापरायततया / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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