________________ द्वितीय प्राभूत-प्रथम प्राभृतप्राभूत] [31 . एगे पुण एवमाहंसु--- 7. ता पुरस्थिमानो लोयंताओ पाओ सरिए आउओ उठेइ, से णं इमं लोयं तिरियं करेइ करित्ता पच्चत्थिमंसि लोयंसि सायं सरिए आउकासि पविसइ, पविसित्ता अहे पडियागच्छइ पडियागच्छित्ता पुणरवि अवरभू-पुरथिमानो लोयंताओ पाओ सूरिए आउओ उठेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु 8. ता पुरस्थिमाओ लोयंताप्रो बहूई जोयणाई बहूई जोयणसयाई बहूई जोयणसहस्साई उड्ढे दूरं उप्पइत्ता एत्थ णं पाओ सूरिए आगासंसि उठेई, से णं इमं दाहिणड्ढं लोयं तिरियं करेइ, करिता उत्तरड्डलोयं तमेव राम्रो, से णं इमं उत्तरडलोयं तिरियं करेइ, करित्ता दाहिणड्डलोयं तमेव राओ, से णं इमाई दाहिण-उत्तरडलोयाई तिरियं करेइ, करित्ता पुरथिमाओ लोयंताओ बहूई जोयणाई बहूई जोयणसयाई, बहूइं जोयणसहस्साई उड्ढे दूर उप्पइत्ता, एत्थ णं पाओ सूरिए आगासंसि उठेइ, एगे एवमाहंसु। वयं पुण एवं वयामो___ता जंबुद्दोवस्स दोवस्स पाईण-पडीणायय-उदीण-दाहिणाययाए जीवाए मंडलं चउन्धीसेणं सएणं छेत्ता दाहिण-पुरस्थिमंसि उत्तर-पच्चत्यिमंसि य चउभाग-मंडलंसि इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए बहुसमरमणिज्जानो भूमिभागाओ अजोयणसयाई उड्ढं उप्पइत्ता-एत्थ णं पाओ दुवे सरिया आगासाओ उत्तिह्रति, ते णं इमाई वाहिणुत्तराई जंबुद्दीब-भागाइं तिरियं करेंति, करेंतिता पुरथिम-पच्चस्थिमाई जंबुद्दीव-भागाइं तामेव रायो, ते णं इमाई पुरथिम-पच्चस्थिमाई जंबुद्दोवभागाइं तिरियं करेंति, करेंतित्ता दाहिणुत्तराई जंबुद्दीवभागाई तामेव राओ, ते णं इमाई दाहिणुत्तराई पुरथिम-पच्चस्थिमाई जंबुद्दीवभागाई तिरियं करेंति, करेंतित्ता जंबुद्दोवस्स दीवस्स पाईण-पडीणायय-उदीण-दाहिणाययाए जीवाए मंडलं चउन्वीसे गं सएणं छेत्ता दाहिण पुरथिमंसि उत्तर-पच्चस्थिमंसि य चउम्भाग-मंडलंसि इमीसे रयणप्पभाए पुढवीए बहुसमरमणिज्जाओ भूमिभागाओ अट्ठ जोयणसयाई उड्ढं उप्पइत्ता-एत्थ णं पाओ दुवे सरिया आगासंसि उत्तिट्ठति / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org