________________ 14] [सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र दाहिण-पुरस्थिमिल्लंसि चउम्भागमंडलंसि एक्काणउइय सूरियमयाइं जाई सूरिए अप्पणा चेव चिण्णाइं पडिचरइ, तत्थ णं अयं एरवए सूरिए भारहस्स सूरियस्स जंबुद्दीवस्स दीवस्स पाईण-पडीणाययाए उदोण-दाहिणाययाए जीवाए मंडलं चउबीसएणं सएणं छेत्ता दाहिण-पच्चथिमिल्लसि चउठभागमंडलंसि बाणउइय सूरियमयाइं जाई सूरिए परस्स चेव चिण्णाई पडिचरइ, / उत्तर-पुरथिमिल्लसि चउभागमंडलंसि एक्काणउइय सूरियमयाइं जाई सूरिए परस्स चेव चिण्णाइंपडिचरइ, ता निक्खममाणा खलु एए दुवे सूरिया णो अण्णमण्णस्स चिण्णं पडिचरंति / पविसमाणा खलु एए दुवे सूरिया अण्णमण्णस्स चिण्णं पडिचरंति सयमेगं चोयालं। 00 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org