________________ 230] [सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र 1830 दिवस / युग के मुहुर्त कितने ? 1830 x 30 -54900 मुहूर्त / 54900 मुहूर्त के कितने वासठिया भाग होते हैं ? 54900 x 62-3403800 वासठिया भाग। --सूत्र 73 समाप्त / बारहवाँ प्राभत समाप्त / सूत्र ७६तेरहवां प्राभूत चन्द्रमा की हानि-वृद्धि शुक्लपक्ष में वृद्धि होती है और कृष्णपक्ष में हानि होतो है। शुक्लपक्ष में 442 मुहूर्त 46/62 भाग की वृद्धि होती है / कृष्णपक्ष में 442 मुहूर्त 46/62 भाग को हानि होती है। चन्द्रमास का प्रमाण एवं चन्द्रमास के मुहूर्तों का प्रमाण सूत्र 72 के अनुसार जानना चाहिये / शुक्लपक्ष 442 मुहूर्त 46/62 भाग हैं। कृष्णपक्ष में 442 मुहूर्त 46/62 भाग हैं / एकपक्ष 14 दिवस 47/62 भागात्मक है / -सूत्र 79 समाप्त। सूत्र 80--- 1 युग में 62 पूणिमा और 62 अमावस्या होती हैं। अमावस्या और पूर्णिमा तक 442 मुहूर्त 46/62 भाग होते हैं / पूर्णिमा से अमावस्या तक 442 मुहूर्त 46/62 भाग होते हैं।। पूर्णिमा से पूर्णिमा तक 885 मुहूर्त 30/62 भाग होते हैं। अमावस्या से अमावस्या तक 885 मुहूर्त 30/62 भाग होते हैं। तेरहवाँ प्राभत समाप्त / सूत्र 80 समाप्त / सूत्र 83 पन्द्रहवां प्राभूत एक मुहूर्त में चन्द्र की गति एक मुहर्त में चन्द्र उस-उस मंडल के 1768 भाग गति करता है। 1 युग के अर्धमंडल 1768 हैं / 1 युग के 1830 दिवस हैं। दो अर्धमंडल अर्थात् एक मंडल की परिक्रमा चन्द्र कितने रात्रि-दिवस में पूर्ण करता है ? यह ज्ञात करने के लिये Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org