________________ परिशिष्ट] [211 1075 1 )1156000 207 01560 7 1449 2145 5 011100 10725 2150 00375 1075 के योजन बनाने के लिये 61 से भाग देने पर [1075 :-61] 17 योजन 38/61 पाएंगे / प्रत्येक मंडल में 17 योजन 38/61 भाग परिक्षेप बढ़ता है। प्रत्येक परिमंडल का परिक्षेप व्यवहार से 18 योजन और निश्चय से 17 योजन 38161 भाग है / प्रत्येक मंडल के परिक्षेप में 18 योजन मिलाने पर दूसरे मंडल का परिक्षेप होता है। ऐसा करने पर सूर्य संक्रमण करता-करता सर्वबाह्य मंडल में आता है तब आयाम विष्कंभ 100660 होता है। सर्वबाह्य मंडल का परिक्षेप 3183 14.869 है व्यवहार से 318315 योजन होता है। सर्वबाह्य मंडल का आयाम-विष्कम-परिक्षेप निकालने की विधि प्रत्येक मंडल में 5 योजन 35 / 61 भाग बढ़ता है जिससे सर्वबाह्यमंडल में कितनी वृद्धि होगी? परिमंडल 183 होने से 5 योजन 35/61 भाग से गुणा करने पर 183 मंडल x 5 योजन = 915 योजन होते हैं। 35 भाग x 183 मंडल - 6405 होते हैं। इनके योजन बनाने के लिये 6405 को 61 से भाग देने पर 105 योजन आते हैं। पूर्वोक्त 915 योजन में 105 योजन मिलाने से 1020 योजन होते हैं / सर्वाभ्यंतरमंडल के आयाम 99640 योजन में 1020 योजन जोड़ने से सर्वबाह्यमंडल का 100660 योजन प्रायाम होता है। सर्वबाह्य मंडल का परिक्षेप 318315 योजन है / जिसको प्राप्त करने की विधि इस प्रकार हैसर्वबाह्यमंडल का परिक्षेप निकालने की विधि परिक्षेप निकालने के लिये Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org