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________________ परिशिष्ट [213 एक अहोरात्र में सूर्य का संचरण-क्षेत्र सूर्य एक अहोरात्र में 2 योजन 48/61 भाग संचरण करता है / सूर्य 183 दिवस में 510 योजन संचरण करता है, जिससे एक दिवस में 2 योजन 48/61 भाग संचरण करता है / 183 मंडल का 183 दिवस में सूर्य संचरण करता है। एक दिवस में एक मंडल में संचार करता है / सूर्य के सर्वमंडलों का संचरण क्षेत्र 510 योजन का है। एक मंडल का एक दिवस का संचरण 2 योजन 48/61 भाग होता है। ----सूत्र 18 प्रथम प्राभृत का छठा प्राभृत-प्राभूत समाप्त / सूत्र 20 प्रत्येक मंडल का विष्कम्भ-आयाम जब सूर्य सर्वाभ्यन्तरमंडल में हो तब 1 लाख योजन का 48/61 भाग बाहल्य से 99640 योजन आयाम-विष्कम्भ से 315089 योजना परिक्षेप से संक्रमण करता है तब 18 मुहूर्त का उत्कृष्ट दिवस और जघन्य 12 मुहूर्त की रात्रि होती है / __ जब सूर्य सर्वाभ्यन्तरमंडल के अनन्तरवर्ती मंडल में संक्रमण करता है तब 1 योजन का 48/61 भाग बाहल्य से 99645 योजन 35/61 भाग आयाम विष्कम्भ से, 315107 योजन किंचित् विशेष न्यून परिक्षेप से चार (गति) करता है / तव दिवस और रात्रि का प्रमाण सर्वाभ्यन्तरमंडल के समान ही होता है। सर्वाभ्यन्तरमंडल में आयाम-विष्कम्भ का प्रमाण एक सूर्य 180 योजन अवगाहन करके गति करता है / जम्बूद्वीप के दोनों सूर्य की अपेक्षा 360 योजन अवगाहना जम्बूद्वीप क्षेत्र के 1 लाख योजन प्रमाण में से कम करने पर 99640 योजन रहते हैं / जो सर्वाभ्यन्तरमंडल का आयाम-विष्कम्भ है / सूत्र 20 सर्वाभ्यन्तरमंडल का परिक्षेप सर्वाभ्यन्तरमंडल का परिक्षेप ( 315089) योजन है / वह इस प्रकार है ( सर्वाभ्यन्तर मंडल का विष्कम्भ )2 x 10 इस सूत्र से परिक्षेप का विचार करने पर निम्न प्रकार से होगा ) (99640)24 10) 9928129600 x 10 ) 99281296000 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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