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________________ परिशिष्ट] [211 रूप में 15 मुहूर्त 30/62 होंगे। इस संख्या को पूर्वोक्त 870 में मिलाने पर 885 मुहूर्त पूर्ण एवं 30/62 मुहूर्त की संख्या होगी। कर्ममास के मुहूर्तों की संख्या एक युग में 30 दिन का एक कर्ममास होता है। उसके मुहूर्त बनाने के लिए 30 से गुणा करने पर 304 30 =900 होते हैं / यह कर्ममास के मुहूतों की संख्या है। मास मुहूतों की संख्या 1 नक्षत्रमास 8194 27/67 मु. 2 सूर्यमास 3 चन्द्रमास 885 / 30/62 मु. 4 कर्ममास 900 म. प्रथम प्राभूत का पाठवां सूत्र समाप्त सूत्रसंख्या 6, 10, 11 366 रात्रि-दिवस का प्रमाण सर्वाभ्यंतरमंडल से सर्वबाह्य मंडल में गमन करने पर एवं सर्वबाह्य मंडल से सर्वाभ्यंतर मंडल में गमन करने पर सूर्य को ( 366 रात्रि दिवस ) लगते हैं / —सूत्र सं. 9 सूर्य 366 दिवस में 184 मंडल में संचार करता है। -सूत्र सं. 10 रात्रि-दिवस की हानि-वृद्धि का प्रमाण सूर्य 366 दिवस में सर्वाभ्यन्तर मंडल में से सर्वबाह्य मंडल में, सर्वबाह्य मंडल में से सर्वाभ्यन्तर मंडल में परिक्रमा करता है / सर्वाभ्यन्तर मंडल में से सर्वबाह्य मंडल तक 183 दिवस में परिक्रमा करता है। जब सूर्य सर्वाभ्यन्तर मंडल में होता है तब 18 मुहूर्त का दिन एवं 12 मुहूर्त की रात्रि होती है। सर्वाभ्यन्तर मंडल में से सर्वबाह्य मंडल तक जाने में 183 दिन होते हैं और उस समय में 6 मुहूर्त की हानि-वृद्धि होती है। एक दिवस में मुहर्त के 2/61 भाग की वृद्धि-हानि होती है। अर्थात् दिवस के परिमाण में मुहूर्त के 2/61 भाग की हानि होती है और रात्रि के परिमाण में मुहूर्त के 2/61 भाग की वृद्धि होती है। सूर्य जैसे-जैसे बाह्यमंडल की ओर गमन करता है वैसे-वैसे दिवस के परिमाण में हानि और रात्रि के प्रमाण में वृद्धि होती है / सूर्य जब सर्वबाह्यमंडल में वर्तमान होता है तब 12 मुहूर्त का दिन और 18 मुहूर्त की रात्रि होती है / सूर्य जैसे-जैसे सर्वाभ्यन्तरमंडल की तरफ गमन करता है वैसे-वैसे दिन में वृद्धि और रात्रि में हानि होती है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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