________________ उन्नीसवां प्रात चंद-सूर-गह-णक्खत्त-ताराणं परिमाणं 100. प. ता कइ णं चंदिम-सूरिया सव्वलोयं ओभासंति, उज्जोएंति, तति, पभासेंति ? आहिए त्ति वएज्जा। उ. तत्थ खलु इमाओ दुवालस पडिवत्तीओ पण्णत्ताओ तंजहा-. तत्थेगे एवमाहंसु--- 1. ता एगे चंदे एगे सूरे सम्वलोयं ओभासइ, उज्जोएइ, तवेइ, पभासइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु-- 2. ता तिण्णि चंदा, तिणि सूरा सव्वलोयं ओभासेंति उज्जोएंति, तति, पभासेंति, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु-- 3. ता अट्ठ चंदा अट्ठ सरा सव्वलोयं ओभासैंति जाव पभासेंति, एगे एबमाहंसु / एएणं अभिलावेणं णेयव्वं, 4. सत्त चंदा, सत्त सूरा, 5. दस चंदा, दस सरा, 6. बारस चंदा, बारस सूरा, 7. बायालीसं चंदा, बायालोसं सरा, 8. बावत्तरी चंदा, बावत्तरों सूरा, 6. बायालोसं चंदसयं बायालीसं सूरसयं, 10. बावत्तरं चंदसयं बावत्तरं सूरसयं, 11. बायालीसं चंदसहस्सं बायालोसं सूरसहस्सं, 12. बावतरं चंदसहस्सं, बावत्तरं सूरसहस्सं, सव्वलोयं ओभासंति उज्जोएंति तर्वेति, पभासेंति एगे एवमाहंसु, वयं पुण एवं वयामो Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org