________________ पण्डित साहत्र श्री शोभाचन्द्रजी भारिल्ल ने समय-समय पर अनेक उपयोगी सुझाव देकर प्रस्तुत संस्करण के सम्पादन में सक्रिय सहयोग किया है। . श्री रुद्रदेवजी त्रिपाठी ने सूर्यप्रज्ञप्ति की प्रस्तावना लिखकर जिज्ञासु ज्योतिविदों को सूर्यप्रज्ञप्ति के स्वाध्याय के लिए प्रेरित किया है। आगम समिति के सूत्रधार सज्जन श्रावकों ने मेरे श्रम की सफलता के लिए जिज्ञासु जनों में इस संस्करण को वितरित किया है। 31 जनवरी '89 -अ. प्र. मुनि कन्हैयालाल 'कमल' -श्री वर्धमान महावीर केन्द्र, प्राबू पर्वत 307 501 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org