________________ पन्द्रहवाँ प्रामृत चंद-सूर-गह-णक्खत्त-ताराणं गइपरूवणं८३. प. ता कहं ते सिग्धगई ? आहिए त्ति वएज्जा / उ. ता एएसि णं चंदिम-सूरिय-गहगण-णक्खत्त-तारारूवाणं-- चंदेहितो सूरे सिग्धगई, सूरेहितो गहा सिग्घगई, गहेहितो णक्खत्ता सिग्घगई, णक्खत्तेहितो तारा सिग्घगई, सव्वप्यगई चंदा सन्वसिग्धगई तारा।' 15. ता एगमेगेणं मुहुत्तेणं चंदे केवइयाई भागसयाई गच्छइ ? उ. ता जंज मंडलं उवसंकमित्ता चारं चरइ तस्स तस्स मंडलपरिषदेवस्स सत्तरस अडसद्धि ___ भागसए गच्छइ, मंडलं सयसहस्से णं अट्ठाणउइ सहि छेत्ता छेत्ता। 25. ता एगमेगेणं मुहुत्तेणं सूरिए केवइयाइं भागसयाई गच्छइ ? उ. ताजं जं मंडलं उघसंकमित्ता चारं चरइ, तस्स तस्स मंडल-परिक्खेवस्स अट्ठारस तीसे भागसए गच्छइ, मंडलं सयसहस्से गं अट्ठाणउइसएहि छेत्ता छेत्ता / 1. प. ता एएसि णं चंदिम-मूरिय-गह-णखत्त-तारारूबाणं कयरे कयरेहितो सिग्घगई वा मंदगई वा ? उ. ता चंदेहितो सूरा सिग्घगई, सूरेहितो गहा सिग्घगई, गहेहितो णखत्ता सिग्धगई, णक्खत्तेहितो तारा सिग्घगई, सब्बप्पगई चंदा, सव्वसिग्घगई तारा / ग्रहों की गति का निरूपण मूल पाठ में नहीं है। ग्रहों की गति के सम्बन्ध में टीकाकार का स्पष्टीकरण :-. ग्रहास्तु वक्रानुवादिगतिभावतोऽनियतगतिप्रस्थानास्ततो न तेषामुक्तप्रकारेण गतिप्रमाणप्ररूपणा कृता, उक्तं 'चंदेहि सिग्घय रा, सूरा सूरेहि होति णक्खत्ता। ग्रणिययगइपत्थाणा, हवंति सेसा गहा सव्वे // 1 // अट्ठारस पणतीसे, भागसए गच्छइ महत्तेणं / नक्खत्तं चंदो पुण, सत्तरससए उ प्रहस? // 2 // अट्ठारस भागसए, तीसे गच्छइ रवी मुहुत्तेण / नक्खत्तसीमछेदो, सो चेव इहं पि णायब्बो / / 3 / / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org