________________ दशम प्राभूत [तेरहवां प्राभृतप्राभूत मुहुत्ताणं णामाई४७. प. ता कहं ते मुहुत्ताणं णामधेज्जा ? आहिए त्ति वएज्जा, उ. एगभेगस्स णं अहोरत्तस्स तीसं मुहुत्ता पण्णत्ता तंजहा गाहाओ:१. रोद्दे, 2. सेते, 3. मित्ते, 4. वायु, 5. सुगीए, 6. अभिचंदे / 6. महिंद, 8. बलव 6. बंभो, 10. बहुसच्चे, 11. चेव ईसाणे // 1 // 12. तळे य, 13. भावियप्पा, 14. वेसमणे, 15. वरुणे य, 16. आणंदे। 17. विजए य, 18. वीससेणे, 19. पायावच्चे चेव, 20. उवसमे य // 2 // 21. गंधव, 22. अग्गिवेसे, 23. सयरिसहे, 24. आयवं च, 25. अममे य / 26. अणवं, 27. च भोम, 28. रिसहे, 26. सव्वळे, 30. रक्खसे चेव // 3 // 0 ख, एतया-ब्रह्म-विष्णु-वरुणादिरूपया परिपाट्या, न तु परतीथिकप्रयुक्त-अश्व-यमदहन-कमलजादिरूपया नेतव्या-परिसमदि प्रापणीया। गाहाप्रो:---- 1. बम्हा, 2. विण्हू, 3. अक्सू, 4. वरुणे, 5. अय, 6. वुड्ढी, 7. पूस, 8. प्रास, 9. जमे / 10. अग्गि, 11. पयावइ, 12. सोमे, 13. मद्दे, 14. अदिति, 15. बहस्सई, 16. सय्ये, // 1 // 17, पिउ, 18. भग, 19. अज्जम, 20. सविमा 21. तटा, 22. वाउ, 23. तहेव, इंदग्गी ! 24. मित्ते, 25. इंदे, 16. निरूई, 27. पाउ, 28. विस्सा या बोद्धब्वे / / 2 / / ---जबु. वक्ख. 47, सु, 174 एक ही प्रागम में अदावीस नक्षत्र-देवताओं के नामों की गाथाएं भिन्न भिन्न रचनाशैली में दो बार ग्राना, विचारणीय प्रश्न है। इसका समाधान बहुश्रुत करें तो जिज्ञासुओं के ज्ञान की वृद्धि हो। 1. एगमेगे णं अहोरते तीसमुहुत्ते मुहुत्तग्गेण पणत्ता, एएसिणं तीसाए मुहत्ताण तीसं नामधेज्जा पण्णत्ता, तं जहा-- 1, रोहे, 2. सत्ते, 3. मित्ते, 4. वाऊ. 5. सुपीए, 6. अभिचंदे, 7. माहिदे, 8. पलंबे, 9. बंभे, 10. सच्चे, 11. पाणंदे, 12. विजए, 13. विस्ससेणे, 14. पायावच्चे, 15. उवसमे, 16. ईसाणे, 17. तळे, 18. भाविअप्पा, 19. देसमणे, 20. वरुणे, 21. सतरिसमे, 22. गंधब्बे, 23. अग्गिवेसायणे, 24. अातवे, 25. आक्ते, 26. तट्टवे, 27. भूमहे, 28. रिसभे, 29. सब्वट्ठसिद्ध 30. रक्खसे, Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org