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________________ छठा प्राभूत सूरियस्स प्रोयसंठिई प-ता कहं ते ओयसंठिई ? आहिय ति वएज्जा / ' उ-तत्थ खलु इमाओ पणवीसं पडिवत्तीओ पण्णत्ताओ, तं जहा तत्थेगे एवमाहंसु१. ता अणुसमयमेव सूरियस्स प्रोया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एक्माहंसु / एगे पुण एवमाहंसु२. ता अणुमुहत्तमेव सूरियस्त ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु--- 3. ता अणुराइदियमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जह, अण्णा अवेइ एगे एवमाहंसु / एगे गुण एवमाहंसु४. ता अणुपक्खमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु५. ता अणुमासमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु-- 6. ता अणुउउमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जा, अण्णा अवेइ एगे एवमासु / एगे पुण एवमाहंसु७. ता अणुअयणमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु८. ता अणुसंवच्छरमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु६. ता अणुजुममेव सूरियस्स ओया अण्णा उच्पज्जइ अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एषमाहंसु१०. ता अणुवाससयमेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेइ, एगे एवमाहंसु / एगे पुण एवमाहंसु११. ता अणवाससहस्समेव सूरियस्स ओया अण्णा उप्पज्जइ, अण्णा अवेह, एगे एवमाहंसु / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003484
Book TitleAgam 16 17 Suryaprajnapti Chandraprajnapti Sutra - Swe Mu Pu Agam 16 17
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages300
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size7 MB
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