________________ सत्तरहवाँ लेश्यापद : द्वितीय उद्देशक] [ 266 गोयमा ! सम्वत्थोवा गम्भवक्कतियपंचेंदियतिरिक्खजोणिया सुक्कलेस्सा, पम्हलेस्सा संखेज्जगुणा, तेउलेस्सा संखेज्जगुणा, काउलेस्सा संखेज्जगुणा, नीललेस्सा विसेसाहिया, कण्हलेस्सा बिसेसाहिया, काउलेस्सा सम्मुच्छिमपंचेंदियतिरिक्खजोणिया प्रसंखेज्जगुणा, णीललेस्सा विसेसाहिया, कण्हलेस्सा विसेसाहिया। [1180-5 प्र.] भगवन् ! इन कृष्णलेश्या वालों से लेकर यावत् शुक्ललेश्यायुक्त सम्मूच्छिम पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिकों और गर्भज पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिकों में से कोन, किनसे अल्प, बहुत, तुल्य और विशेषाधिक हैं ? [1180-5 उ.] गौतम ! सबसे कम शुक्ललेश्या वाले गर्भज पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिक हैं। (उनसे) पद्मलेश्यावाले (वे) संख्यातगुणे हैं, (उनसे) तेजोलेश्याविशिष्ट (वे) संख्यातगुणे हैं, (उनसे) नीललेश्याविशिष्ट (गर्भज तिर्यञ्चपंचेन्द्रिय) विशेषाधिक हैं, (उनसे) कृष्णलेश्यायुक्त (वे) विशेषाधिक हैं, (उनकी अपेक्षा) कापोतलेश्या वाले सम्मूच्छिम पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिक असंख्यातगुणे हैं, (उनसे) नीललेश्या वाले (वे) विशेषाधिक हैं (और उनसे भी) कृष्णलेश्या वाले (सम्मूच्छिम पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिक) विशेषाधिक हैं। [6] एतेसि भंते ! सम्मुच्छिमपंचेंदियतिरिक्ख जोणियाणं तिरिक्खजोणिणोण य कण्हलेस्प्ताणं जाव सुक्कलेस्साण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा 4 ? / गोयमा ! जहेव पंचमं (सु. 1180 [5]) तहा इमं पिछट्ठ माणियव्वं / [1180.6 प्र.] भगवन् ! कृष्ण लेश्या वालों से लेकर यावत् शुक्ललेश्या वाले सम्मूच्छिम पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिकों और तिर्यञ्चयोनिक स्त्रियों में से कौन, किनसे अल्प, बहुत, तुल्य और विशेषाधिक हैं ? [1180.6 उ.] गौतम ! जैसे (सृ. 1180-5 में) पंचम (कृष्णादिलेश्यायुक्त तिर्यञ्चयोनिक सम्बन्धी) अल्पबहुत्व कहा है, वैसे ही यह छठा. (सम्मूच्छिम पंचेन्द्रियतिर्यञ्चों और तिर्यञ्चयोनिकों स्त्रियों का कृष्णलेश्यादिविषयक) अल्पबहुत्व कहना चाहिए। [7] एतेसि णं भंते ! गब्भवक्कंतियपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं तिरिक्खजोणिणोण य कण्हलेस्साणं जाव सुक्कलेस्साण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा 4 ? गोयमा ! सव्वत्थोवा गम्भवक्कतियपंचेंदियतिरिक्खजोणिया सुक्कलेस्सा, सुक्कलेस्सायो तिरिक्खजोगिणीनो संखेज्जगुणामो, पम्हलेस्सा गम्भवक्कतियपंचेंदियतिरिक्खजोणिया संखेज्जगुणा, पम्हलेस्सानो तिरिक्खजोणिणोओ संखेज्जगुणाप्रो, तेउलेस्सा० संखेज्जगुणा, तेउलेस्साश्रो० संखेज्ज गुणायो, काउलेस्सा० संखेज्जगुणा, गोललेस्सा० विसेसाहिया, कण्हलेस्सा० विसेसाहिया, काउलेस्साओ० संखेज्जगुणाम्रो, णोललेस्साश्रो० विसेसाहियानो, कण्हलेस्साप्रो० विसेसाहियानो। [1180-7 प्र.] भगवन् ! इन कृष्णालेश्या वालों से लेकर यावत् शुक्ललेश्या वाले गर्भज पंचेन्द्रियतिर्यञ्चयोनिकों और तिर्यञ्चस्त्रियों में से कौन, किनसे अल्प, बहुत, तुल्य और विशेषाधिक Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org