________________ 173 173 द्वितीय उद्देशक द्वितीय उद्देशक के बारह द्वार प्रथम इन्द्रियोपचयद्वार द्वितीय-तृतीय निर्वतं नाहार चतुथ-पंचम-पाटलब्धिद्वार, उपयोगट्टार उपयोगाद्वाद्वार मातवा, पाटवा. नीवाँ, दमवाँ इन्द्रिय-अवग्रहण-अवाय-ईहा-अवग्रह द्वार भ्यारहवां द्रव्ये न्द्रियद्वार बारहवाँ भावेन्द्रिबहार 174 175 177 सोलहवाँ प्रयोगपद प्राथमिक प्रयोग और उसके प्रकार ममुच्चयजीवों और चौवीम दंडका में प्रयोग की प्ररूपणा समुच्चय जीवां में विभाग में प्रयोगप्ररूपणा नारकों और भवनपतियों की विभाग से प्रयोगप्ररूपणा एकेन्द्रियों, विकलन्द्रियों और ति. पंचेन्द्रियों की प्रयोगप्ररूपणा मनुष्यों में विभाग में प्रयोगप्ररूपणा वाणव्यन्तरादि देवों की विभाग में प्रयोगप्ररूपणा गतिप्रगत के भेद-प्रभेद एवं उनके स्वरूप का निरूपण . . . सत्तरहवाँ लेश्यापद प्रथम उद्देशक प्राथमिक प्रथम उद्देशक में वणित मप्त द्वार नारकों में समाहागदि मात दारों की प्ररूपणा अमरकुमारादि में , पथ्वीकायिकों में लि. पं. ., मनुप्य में वाणव्यन्तर, ज्योतिक व वैमानिकों की आहारादि-प्ररूपणा मलेण्य चौवीम दंडकावर्ती जीवों की कृष्णादिलण्याविशिष्ट चौवीम दंडकों में .. SIA Nxxx NA 5 . X 256 द्वितीय उद्देशक लेण्या के भेदों का निरूपण चौवीम दण्डकों में लेण्यासंबंधी प्ररूपणा मन्नध्य अलेण्य जीवों का अल्पबहुत्व [ 11 ] Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org