________________ नौवा योनिपद : प्राथमिक] [515 शरीर का चयोपचय भी होता है, किन्तु प्रबल कामाग्नि के ताप से वे वहीं नष्ट हो जाते हैं, जन्म धारण नहीं करते, गर्भ से बाहर नहीं आते। इससे विदित होता है कि प्रबल कामभोग से गर्भस्थ जीव पनप नहीं सकता / तीसरी वंशीपत्रा योनि सर्वसाधारण मनुष्यों की होती है।' 00 (क) पण्णवणासुत्तं मूलपाठ भा. 1, पृ. 190 से 192 / (ख) पण्णवणासुत्त (परिशिष्ट और प्रस्तावना) भा. 2, पृ. 77-78 / (ग) जैनागम साहित्य: मनन और मीमांसा, पृ. 243 / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org