________________ 502] [ प्रज्ञापनासूत्र 720. उद वेज्जगाणं भंते ! देवा केवतिकालस्स जावनीमसंतिवा? गोयमा ! जहण्णणं अट्ठावीसाए पक्खाणं जाव नीससंति वा, उक्कोसेणं एगूणतीसाए पक्खाणं जावणीससंति वा। [720 प्र.] भगवन् ! उपरितन-अधस्तन वेयक देव कितने काल से (आन्तरिक) उच्छ्वास यावत् (बाह्य) निःश्वास लेते हैं ? [720 उ.] गौतम ! (वे) जघन्यतः अट्ठाईस पक्षों में और उत्कृष्टतः उनतीस पक्षों में (अन्तःस्फुरित) उच्छ्वास यावत् (बाह्य) निःश्वास लेते हैं। 721. उरिमझिमगेवेज्जगा णं भंते ! देवा केवतिकालस्स जाव नोससंति का ? गोयमा ! जहण्णेणं एगणतीसाए पक्खाणं जाव नोससंति वा, उक्कोसेणं तीसाए पक्खाणं जाव नीसति बा। [721 प्र. भगवन् ! उपरितन-मध्यमग्रे वेयक देव कितने काल से (पान्तरिक) उच्छ्वास यावत् (बाह्य) नि:श्वास लेते हैं ? [721 उ.] गौतम ! (वे) जघन्यत: उनतीस पक्षों में और उत्कृष्टत: तीस पक्षों में (अन्त:स्फुरित) उच्छ्वास यावत् (बाह्यस्फुरित) नि:श्वास लेते हैं / 722. उवरिमउवरिमगेवेज्जगा णं भंते ! देवा णं केवतिकालस्स जाव नीससंति वा? गोयमा ! जहणणं तोसाए पक्खाणं जाव नोससंति वा, उक्कोसेणं एक्कतोसाए पक्खाणं जाव नीससंति वा। [722 प्र.] भगवन् ! उपरितन-उपरितन वेयक देव कितने काल से (प्रान्तरिक) उच्छ्वास यावत् (बाह्य) निःश्वास लेते हैं ? [722 उ.] गौतम ! (वे) जघन्यत: तीस पक्षों में और उत्कृष्टतः इकतीस पक्षों में (अन्त:स्फुरित) उच्छ्वास यावत् (बाह्यस्फुरित) निःश्वास लेते हैं / 723. विजय-वेजयंत-जयंताऽपराजितविमाणेसु णं भंते ! देवा केवतिकालस्स जाव नोससंति वा? गोयमा ! जहणेणं एक्कतीसाए पक्खाणं जाव नोससंति वा, उक्कोसेणं तेत्तीसाए पक्खाणं जाव नीससंति वा / [723 प्र.] भगवन् ! विजय, वैजयन्त, जयन्त और अपराजित विमानों के देव कितने काल से (आन्तरिक) उच्छ्वास" यावत् (बाह्य) निःश्वास लेते हैं ? [723 उ.] गौतम ! (वे) जघन्यतः इकतीस पक्षों में और उत्कृष्टत: तेतीस पक्षों में (अन्तःस्फुरित) उच्छ्वास यावत् (बाह्यस्फुरित) निःश्वास लेते हैं। 724. सम्वसिद्धगदेवा गं भंते ! केवतिकालस्स जाव नीससंति वा ? गोयमा ! अजहण्णमणुक्कोसेणं तेत्तीसाए पक्खाणं जाव नीससंति वा। // पण्णवणाए भगवईए सत्तमं उस्सासपयं समत्तं // Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org