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________________ 282] [प्रज्ञापनासूत्र गोयमा ! सम्वत्थोवा एगपदेसोगाढा पोग्गला दवढयाए 1, संखज्जपदेसोगाढा पोग्गला दत्वयाए संखेज्जगुणा 2, असंखज्जपएसोगाढा पोग्गला दवट्ठयाए असंखज्जगुणा 3; पएसट्टयाएसव्वत्थोवा एगपएसोगाढा पोग्गला पएसट्ठयाए 1, संखजपएसोगाढा पोग्गला पदेसट्टयाए संखज्जगुणा 2, असंखज्जपएसोगाढा पोग्गला पएसट्टयाए असंख ज्जगुणा 3, दवट्ठपएसट्टयाए-सव्वत्थोवा एगपएसोगाढा पोग्गला दवट्ठपएसट्टयाए 1, संखज्जपएसोगाढा पोग्गला दवढयाए संखे जगुणा 2, ते चेव पएसटुयाए संखज्जगुणा 3, असंख जपदेसोगाढा पोग्गला दब्वट्ठयाए असंखज्जगुणा 4, ते चेव पदेसट्टयाए असंखज्जगुणा 5 / [331 प्र.] भगवन् ! इन एकप्रदेशावगाढ़, संख्यातप्रदेशावगाढ़ और असंख्यातप्रदेशावगाढ़ पुद्गलों में द्रव्य की अपेक्षा से प्रदेशों की अपेक्षा से और द्रव्य एवं प्रदेशों की अपेक्षा से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [331 उ.] गौतम ! 1. सबसे कम द्रव्य की अपेक्षा से एक प्रदेश में अवगाढ़ पुद्गल हैं, 2. (उनकी अपेक्षा) संख्यातप्रदेशों में अवगाढ़ पुद्गल, द्रव्य की अपेक्षा से संख्यातगुण हैं, 3. (उनकी अपेक्षा) द्रव्य की अपेक्षा से असंख्यातप्रदेशों में अवगाढ़ पुद्गल असंख्यात हैं। प्रदेशों को दृष्टि से प्रल्पबहुत्व-१. सबसे कम, प्रदेशों की अपेक्षा से, एकप्रदेशावगाढ़ पुद्गल हैं, 2. (उनकी अपेक्षा) संख्यातप्रदेशावगाढ पुदगल, प्रदेशों की अपेक्षा से, संख्यातगुणे हैं, 3. (उनकी अपेक्षा) असंख्यातप्रदेशावगाढ पुदगल, प्रदेशों की अपेक्षा से असंख्यातगुणे हैं। द्रव्य एवं प्रदेश की अपेक्षा से अल्पबहुत्व--१. सबसे कम एकप्रदेशावगाढ़ पुद्गल, द्रव्य एवं प्रदेश की अपेक्षा से हैं, 2. (उनको अपेक्षा) संख्यातप्रदेशावगाढ़ पुद्गल, द्रव्य की अपेक्षा से संख्यातगुणे हैं, 3. (उनकी अपेक्षा) वे (संख्यातप्रदेशावगाढ़ पुद्गल) ही प्रदेश की अपेक्षा से संख्यातगुणे हैं, 4. (उनकी अपेक्षा) असंख्यातप्रदेशावगाढ़ पुद्गल, द्रव्य की अपेक्षा से असंख्यातगुणे हैं, 5. (उनकी अपेक्षा) वे (असंख्यातप्रदेशावगाढ़ पुद्गल) ही, प्रदेश की अपेक्षा से असंख्यातगुणे हैं। 332. एतेसि णं भंते ! एगसमयठितीयाणं संखेज्जसमयठितीयाणं असंखेज्जसमयठितीयाण य पोग्गलाणं दध्वट्ठयाए पदेसट्टयाए दबटुपएसट्टयाए कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयया ! सम्वत्थोवा एगससमयठितीया पोग्गला दबट्टयाए 1, संखेज्जसमठितीया पोग्गला वव्वयाए संखेज्जगुणा 2, असंखेज्जसमयठितीया पोग्गला दवढयाए असंखेज्जगुणा 3; पदेसट्टयाएसम्वत्थोवा एगसमयठितीया पोग्गला पदेसट्टयाए 1, संखेज्जसमयठितीया पोग्गला पदेसट्टयाए संखेज्जगूणा 2, असंखेज्जसमयठितीया पोग्गला पदेसटुवाए असंखेज्जगुणा 3; दवटुपदेसट्टयाएसम्वत्थोवा एगसमयठितीया पोग्गला दब्वट्ठपदेसट्टयाए 1, संखेज्जसमयठितीया पोग्गला दवट्टयाए संखेज्जगुणा 2, ते चेव पदेसट्टयाए संखेज्जगुणा 3, असंखेज्जसमठितीया पोग्गला दवट्ठयाए असंखेज्जगुणा 4, ते चेव पदेसट्टयाए असंखेज्जगुणा / / [332 प्र.] भगवन् ! इन एक समय की स्थिति वाले, संख्यात समय की स्थिति वाले और असंख्यात समय की स्थिति वाले पुद्गलों में से द्रव्य की अपेक्षा से, प्रदेशों की अपेक्षा से एवं द्रव्य तथा प्रदेश की अपेक्षा से कौन किनसे अल्प, बहत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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