________________ तृतीय बहुवक्तव्यतापद [ 223 [238 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े सूक्ष्म तेजस्कायिक अपर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) सूक्ष्म पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं. 3. (उनसे) सूक्ष्म अप्कायिक, अपर्याप्त विशेषाधिक हैं; 4. (उनसे) सूक्ष्म वायुकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 5. (उनसे) सूक्ष्म निगोद अपर्याप्तक असंख्यातगुण हैं, 6. (उनसे) सूक्ष्म वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक अनन्तगुणे हैं और 7. (उनसे भी) सूक्ष्म अपर्याप्तक जीव विशेषाधिक हैं। 236. एतेसि णं भंते ! सुहमपज्जत्तगाणं सुहुमयुढविकाइयपज्जत्तगाणं सुहुमनाउकाइयपज्जत्तगाणं सुहुमतेउकाइयपज्जत्तगाणं सुहुमवाउकाइयपज्जत्तगाणं सुहुमवणप्फइकाइयपज्जत्तगाणं सुहुमनिगोदपज्जत्तगाण य कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सव्वत्थोवा सहमतेउषकाइया पज्जत्तगा 1, सुहमपुढविकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 2, सुहुम ग्राउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 3, सुहमवाउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 4, सुहमणिपोया पज्जत्तगा असंखेगुणा 5, सुहुमवणप्फइकाइया पज्जत्तया अणंतगुणा 6, सुहुमा पज्जत्तगा विसेसाधिया / 239 प्र.] भगवन् ! इन सक्ष्म पर्याप्तक, सूक्ष्म पृथ्वीकायिक पर्याप्तक, सूक्ष्म अप्कायिक पर्याप्तक, सूक्ष्म तेजस्कायिक पर्याप्तक, सूक्ष्म वायुकायिक पर्याप्तक, सूक्ष्म वनस्पतिकायिक पर्याप्तक और सूक्ष्म निगोद पर्याप्तक जीवों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [239 उ.] गौतम ! 1 सबसे थोड़े सूक्ष्म तेजस्कायिक पर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) सूक्ष्म पृथ्वीकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 3. (उनसे) सूक्ष्म अप्कायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 4. (उनसे) सूक्ष्म वायुकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 5. (उनसे) सूक्ष्म निगोद पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 6. (उनसे) सूक्ष्म वनस्पतिकायिक पर्याप्तक अनन्तगुणे हैं और 7. (उनसे भी) विशेषाधिक सूक्ष्म पर्याप्तक जीव हैं। 240. [1] एतेसि णं भंते ! सुहुमाणं पज्जत्ताऽपज्जत्तयाणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सम्वत्थोवा सुहमा अपज्जत्तगा, सुहुमा पज्जत्तगा संखेज्जगुणा / [240-1 प्र.] भगवन् ! इन सूक्ष्म पर्याप्तक-अपर्याप्तक जीवों में कौन किन से अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक हैं ? [240 1 उ.] गौतम ! सबसे अल्प सूक्ष्म अपर्याप्तक जीव हैं, उनसे सूक्ष्म पर्याप्तक जीव संख्यातगुणे हैं। [2] एतेसि णं भंते ! सुहमपुढविकाइयाणं पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सव्वत्थोवा सुहमपुढविकाइया अपज्जत्तगा, सुहुमपुढविकाइया पज्जतगा संखेज्जगुणा / Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org