SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 251
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 218] [प्रज्ञापनासन गोयमा ! सम्वत्थोवा तसकाइया अपज्जत्तगा 1, तेउकाइया अपज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, पुढविकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 3, प्राउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 4, वाउकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 5, वणप्फइकाइया अपज्जत्तगा अणंतगुणा 6, सकाइया अपज्जत्तगा विसेसाहिया 7 / [233 प्र.] भगवन् ! इन सकायिक, पृथ्वीकायिक, अप्कायिक, तेजस्कायिक, वायुकायिक, वनस्पतिकायिक और त्रसकायिक अपर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक [233 उ.] गौतम ! 1. सबसे थोड़े त्रसकायिक अपर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) तेजस्कायिक अपर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) पृथ्वीकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 4. (उनसे) अप्कायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 5. (उनसे) वायुकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं. 6. (उनसे) वनस्पतिकायिक अपर्याप्तक अनन्तगुणे हैं, 7. और (उनसे भी) सकायिक अपर्याप्तक विशेषाधिक हैं। 234. एतेसि गं भंते ! सकाइयाणं पुढधिकाइयाणं पाउकाइयाणं तेउकाइयाणं वाउकाइयाणं वणस्सइकाइयाणं तसकाइयाण य पज्जत्तयाणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया बा ? गोयमा ! सम्वत्थोवा तसकाइया पज्जत्तगा 1, तेउकाइया पज्जत्तगा असंखेज्जगुणा 2, पुढविकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 3, आउकाइया पज्जत्तगा विसे साहिया 4, वाउकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 5, वणप्फइकाइया पज्जत्तगा अणंतगुणा 6, सकाइया पज्जत्तगा विसेसाहिया 7 / [234 प्र.] भगवन् ! इन सकायिक, पृथ्वीकायिक, अप्कायिक, तेजस्कायिक, वायुकायिक, वनस्पतिकायिक और त्रसकायिक पर्याप्तकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य अथवा विशेषाधिक [234 उ.] गौतम ! 1. सबसे अल्प त्रसकायिक पर्याप्तक हैं, 2. (उनसे) तेजस्कायिक पर्याप्तक असंख्यातगुणे हैं, 3. (उनसे) पृथ्वीकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 4. (उनसे) अप्कायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं. 5. (उनसे) बायकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं, 6. (उनसे) वनस्पतिकायिक पर्याप्तक अनन्तगुणे हैं और 7. (उनसे भी) सकायिक पर्याप्तक विशेषाधिक हैं। 235. [1] एतेसि णं भंते ! सकाइयाणं पज्जत्ताऽपज्जताणं कतरे कतरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा ? गोयमा ! सव्वत्थोवा सकाइया अपज्जत्तगा, सकाइया पज्जत्तगा संखिज्जगुणा / [235-1 प्र.] भगवन् ! इन पर्याप्त और अपर्याप्त सकायिकों में से कौन किनसे अल्प, बहुत, तुल्य, अथवा विशेषाधिक हैं ? [235-1 उ.] गौतम ! सबसे थोड़े सकायिक अपर्याप्तक हैं, (उनसे) सकायिक पर्याप्तक संख्यातगुणे हैं। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy