________________ 172 [ प्रज्ञापनासूत्र करते हुए ...(आगे का समग्र वर्णन) यावत् विचरण करते हैं (विहरंति') तक सू. 188 के अनुसार समझना चाहिए / [2] चंदिम-सूरिया यऽत्थ दुवे जोइसिंदा जोइसियरायाणो परिवति महिड्डिया जाव (सु. 188) पभासेमाणा / ते णं तत्थ साणं साणं जोइसियविमाणाकाससतसहस्साणं चउण्हं सामाणियसाहस्सीणं चउण्हं अग्गमाहितीणं सपरिवाराणं तिण्हं परिसाणं सत्तण्हं अणियाणं सत्तण्हं अणियाधिवतीणं सोलसण्हं प्रायरक्खदेवसाहस्सीणं अण्णेसि च बहूणं जोइसियाणं देवाण य देवीण य पाहेबच्चं पोरेवच्चं जाव विहरंति / [195-2] इन्हीं (पूर्वोक्त ज्योतिष्कविमानावासों) में दो ज्योतिष्केन्द्र ज्योतिष्कराज-चन्द्रमा और सूर्य-निवास करते हैं; 'जो महद्धिक हैं' (इत्यादि सब वर्णन सू. 188 के अनुसार) यावत् प्रभासित करते हुए ('पभासेमागे') (तक पूर्ववत् समझना चाहिए / ) वे वहाँ अपने-अपने लाखों ज्योतिष्कविमानावासों का, चार हजार सामानिक देवों का, सपरिवार चार अग्रमहिषियों का, तीन परिषदों का, सात सेनाओं का, सात सेनाधिपति देवों का, सोलह हजार प्रात्मरक्षक देवों का तथा अन्य बहुत-से ज्योतिष्क देवों और देवियों का आधिपत्य, पुरोवत्तित्व करते हुए यावत् विचरण करते हैं। विवेचन--ज्योतिष्क देवों के स्थानों को प्ररूपणा–प्रस्तुत सूत्र (सू. 195-1, 2) में ज्योतिष्क देवों तथा उनके परिवारों एवं उनके चन्द्र, सूर्य नामक दो इन्द्रों के स्थानों, उनकी प्रकृति, विशेषता, प्रभुता एवं ऐश्वर्य श्रादि की प्ररूपणा की गई है / ' सर्व वैमानिक देवों के स्थानों की प्ररूपरणा 166. कहि णं भंते ! वेमाणियाणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं ठाणा पण्णता ? कहि णं भंते ! वेमाणिया देवा परिवसंति ? गोयमा ! इमोसे रयणप्पभाए पुढको ए बहुसमरमणिज्जातो भूमिभागातो उड्डे चंदिम-सूरियगह-णक्खत्त-तारारूवाणं बहूइं जोयणसताई बहूई जोयणसहस्साई बहूई जोयणसयसहस्साई बहुगोरो जोयणकोडोप्रो बहुगीग्रो जोयणकोडाकोडीनो उड्ढ दूरं उप्पइत्ता एस्थ णं सोहम्मोसाण-सणंकुमारमाहिद-बंभलोय-लंतग-महासुक्क-सहस्सार-प्राणय-पाणय-प्रारण-अच्चुत-गेवेज्ज-अणुत्तरेसु एत्थ णं वेमाणियाणं देवाणं चउरासीइ विमाणावाससतसहस्सा सत्ताणउई च सहस्सा तेवीसं च विमाणा भवंतीति मक्खातं। तेणं विमाणा सध्वरतणामया अच्छा सहा लण्हा घट्टा मट्ठा नीरया निम्मला निष्पंका निवकंकडच्छाया सप्पभा सस्सिरीया सउज्जोया पासादीया दरिसणिज्जा अभिरूवा पडिरूवा / एत्थ णं वेमाणियाणं देवाणं पज्जत्ताऽपज्जत्ताणं ठाणा पन्नत्ता / तिसु वि लोयस्स असंखेज्जइभागे। तत्थ णं बहवे वेमाणिया देवा परिवसंति / तं जहा-सोहम्मीसाण-सणंकुमार-माहिद-बंभलोगलंतग-महासुक्क-सहस्सार-प्राणय-पाणय-आरण-ऽच्चुय-गेवेज्जगा-ऽणुत्तरोववाइया देवा। 16. (क) प्रज्ञापनासूत्र मलय. वृत्ति, पत्रांक 99 (ख) पग्णवणासुत्तं भा. 1 (मूलपाठ) पृ. 67-68 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org