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________________ 16. ] [ प्रज्ञापनासूत्र करता है, जो महद्धिक है; शेष सारा वर्णन नागकुमारों की तरह (सू. 183-2 के अनुसार) समझना चाहिए। 187. एवं जहा सुवष्णकुमाराणं वत्तव्वया भणिता तहा सेसाण वि चोद्दसण्हं इंदाणं माणितव्वा। नवरं भवणनाणत्तं इंदणाणत्तं वण्णणाणत्तं परिहाणणाणत्तं च इमाहि गाहाहि अणुगंतव्वं-- चोटुिं प्रसुराणं 1 चुलसीती चेव होंति जागाणं 2 / बावतरि सुवण्णे 3 वाउकुमाराण छष्णउई 4 // 138 / / दोब-दिसा-उदहीणं विज्जुकुमारिद-णिय-मग्गीणं / छह पि जुअलयाणं छावत्तरिमो सतसहस्सा 10 // 136 / / चोत्तोसा 1 चोयाला 2 अट्टत्तीस च सयसहस्साई 3 / पण्णा 4 चत्तालीसा 5.10 दाहिणतो होंति भवणाई // 140 // तीसा 1 चत्तालीसा 2 चोत्तीस चेव सयसहस्साई 3 / छायाला 4 छत्तीसा 5-10 उत्तरप्रो होंति भवणाइं // 141 // चउसट्ठी सट्टी, 1 खलु छ च्च सहस्सा 2-10 उ प्रसुरवज्जाणं / सामाणिया उ एए, चउग्गुणा पायरक्खा उ // 142 // चमरे 1 धरणे 2 तह वेणुदेव 3 हरिकंत 4 अग्गिसीहे य / पुण्णे 6 जलकंते या 7 अमिय 8 विलंबे यह घोसे य 10 // 143 // बलि 1 भूयाणंदे 2 घेणुदालि 3 हरिस्सहे 4 अग्गिमाणव 5 वसिढे 6 / जलप्पहे 7 अमियवाहण 8 पभंजणे या महाघोसे 10 // 144 // उत्तरिल्लाणं जाव विहरति / काला असुरकुमारा, जागा उदही य पंडरा दो वि / वरकणगणिहसगोरा होंति सुवण्णा दिसा थणिया // 145 / / उत्तत्तकणगवन्ना विज्जू अग्गी य होति दीवा य / सामा पियंगुवण्णा वाउकुमारा मुणयन्वा // 146 // असुरेसु होंति रत्ता, सिलिघपुप्फप्पभा य नागुदही / प्रासासगवसणधरा होंति सुवण्णा दिसा थणिया // 147 // णीलाणुरागवसणा विज्जू अग्गी य होंति दोवा य / संझाणुरागवसणा वाउकुमारा मुणेयव्वा / / 148 // [187] इस प्रकार जैसी वक्तव्यता सुपर्णकुमारों की कही है, वैसी ही शेष भवनवासियों की भी और उनके चौदह इन्द्रों की भी कहनी चाहिए। विशेषता यह है कि उनके भवनों की संख्या में, इन्द्रों के नामों में, उनके वर्णों तथा परिधानों (वस्त्रों) में अन्तर है, जो इन गाथानों द्वारा समझ लेना चाहिए -- Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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