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________________ प्रथम प्रज्ञापनापद] 109. से किं तं दसणारिया ? दसणारिया दुविहा पण्णता / तं जहा-सरागदसणारिया य बीयरागदसणारिया य। [106 प्र. वे दर्शनार्य कौन-कौन-से हैं ? / [106 उ. दर्शनार्य दो प्रकार के कहे गए हैं। वे इस प्रकार-सरागदर्शनार्य और वीतरागदर्शनार्य / 110. से कि तं सरागसणारिया ? सरागदसणारिया दसविहा पण्णता / तं जहा--- निस्सग्गुवएसरुई 1.2 प्राणारुइ ३-सुत्त ४-बीयरुइ 5 मेव / अहिगम ६-वित्थाररुई 7 किरिया -संखेव ६-धम्मरुई 10 // 11 // भूप्रत्येणाधिगया जीवाऽजीवं च पुण्ण-पावं च / सहसम्मुइयाऽऽसब-संवरे य रोएइ उ णिसम्मो // 120 // जो जिदिठे भावे चउम्विहे सद्दहाइ सयमेव / एमेव पडण्णह त्ति य णिस्सग्गरुइ ति णायधो 1 // 121 // एते चेव उ मावे उवदिठे जो परेण सद्दहइ / छउमत्येण जिणेण व उवएसरुइ ति नायब्धो 2 // 122 // जो हेउमयाणंतो प्राणाए रोयए पवयणं तु / एमेव पऽण्णह ति य एसो प्राणारुई नाम 3 // 123 // जो सुत्तमहिज्जतो सुएण प्रोगाहई उ सम्मत्तं / अंगेण बाहिरेण व सो सुत्तरुइ ति णायन्बो 4 // 124 // एगपएऽणेगाइं पदाइं जो पसरई उ सम्मत्तं / उदए व तेल्लबिंदू सो बीयरुइ ति णायव्यो 5 // 125 // सो होइ अहिगमरुई सुयणाणं जस्स प्रस्थो दिनें। एक्कारस अंगाई पइण्णगं दिद्विवानो य 6 // 126 // दव्वाण सव्वभावा सम्वपमाहि जस्स उवलद्धा / सव्वाहि णयविहीहि विस्थाररुइ त्ति णायन्यो 7 // 127 // दसण-णाण-चरित्ते तव-विणए सब्समिइ-गुत्तीसु / जो किरियामावरुई सो खलु किरियाई णाम 8 // 12 // अणभिगहियकुदिट्ठी संखेवरुइ त्ति होइ णायव्यो / अविसार यो पवयणे प्रणभिग्गहिरो य सेसेसु 9 // 126 / / जो अस्थिकायधम्मं सुयधम्म खलु चरित्तधम्मं च / सहइ जिणामिहियं सो धम्मरुइ ति मायन्यो 10 // 130 // Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003483
Book TitleAgam 15 Upang 04 Pragnapana Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorShyamacharya
AuthorMadhukarmuni, Gyanmuni, Shreechand Surana, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1983
Total Pages1524
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size37 MB
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