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________________ तृतीय प्रतिपक्ति : एकोरुक द्वीप के पुरुषों का वर्णन] [301 ज्जरोमराई, गंगावत्त पयाहिणायल तरंग भंगुर रविकिरण तरुण बोधित अकोसायंत पउम गंभीर वियडनामी प्रसविहग सुजात पीणकुच्छी, शसोयरा सुइकरणा पम्हवियडनामा सण्णययासा संगतपासा सुजातपासा मितमाइय पीणरायपासा प्रकरुंडय गगरुयगनिम्मल सुजाय निरुवहयदेहधारी पसस्थ बत्तीस लक्खणधरा कणगसिलातलुजल पसत्य समतलोवचिय विच्छिन्न पिहलवच्छा सिरिवच्छंकिवच्छा पुरवरफलिह वट्टिय भुजा, भुयगीसर विपुलभोग आयाण फलिह उच्छुढ दोहबाहू, जुगसन्निभ पीणरइयपीवर पउट्ठसंठिय सुसिलिट्ठ विसिट घथिर सुबद्ध निगूढ पव्वसंधी रत्ततलोवइय मउयमंसल पसत्थ लक्खण सुजाय अच्छिद्दजालपाणी, पोवरवट्टिय सुजाय कोमल वरंगुलीया तंबलिन सुचिरुइरणिद्ध णक्खा चंदपाणिलेहा सूरपाणिलेहा संखपाणिलेहा, चक्कपाणिलेहा दिसासोत्थिय पाणिलेहा चंदसूरसंख चक्कदिसासोत्थिय पाणिलेहा अणेगवर लक्खणुत्तम पसत्थरइय पाणिलेहा वरमहिस वराहसीह सद्ल उसमणागवर पडिपुन्न विउल उन्नत खंधा, चउरंगुल सुष्पमाण कंबुवर सरिसगीधा अवहित सुविमत्त सुजात चित्तमंसुमंसल संठिय पसत्थ सद्दूलविपुल हणुया, ओतविय सिलप्पवाल बिबफल सनिभाहरोट्ठा पंडुरससि सगल विमल निम्मल संखगोखोरफेण वगरय मुणालिया धवल दंतसेढी अखंडदंता अफुडियवंता अविरलता सुजातवंता एगदंतसे दिव्य अगदंता हुतवह निद्धतधोत तत्तवणिज्जरत्ततलतालुजोहा गरुलायय उज्जुतुंग गासा अवदालिय पोंडरीयनयणा कोकासितधवलपत्तलच्छा आणामिय चावरुदर किण्हन्भराइय संठिय संगय आयत सुजात तणुकसिणनिद्ध भुमया अल्लीणप्पमाणजुत्त सवणा सुस्सवणा पोणमंसल कवोलदेसभागा अचिरुग्गय बालचंवसंठिय पसत्थ विच्छिन्नसमणिडाला, उडुबइपडिपुण्णसोमवदणा छत्तागारुत्तमं गदेसा, घणनिधिय सुबद्ध लक्खणुण्णय कूडागारणिपिडियसीसे वाडिमपुष्फपगास तकणिज्जसरिस निम्मल सुजाय केसंत केसमूमी सामलिय बोंड घणाणिचिय छोडियमिउविसयपसत्थ सुहुम लक्खण सुगंध सुन्दर भुययोयग भिगिणीलकज्जल पहट्ट भमरगण णिणिकुरंब निचिय. कुचियपदाहिणावत्तमुखसिरया, लक्खणवंजणगुणोववेया सुजाय सुविभत्त सुरूवगा पासाइया दरिसणिज्जा अभिरूवा पडिल्वा। ते णं मणुया हंसस्सरा कोंचस्सरा नंदिघोसा सीहस्सरा सोहघोसा मंजुस्सरा मंजुघोसा सुस्सरा सुस्सरनिग्घोसा छायाउज्जोतियंगमंगा वज्जरिसभनारायसंघयणा, समचउरंससंठाणसंठिया सिणिद्धछवी णिरायंका उत्तमपसत्थ अइसेसनिरुवमतणू जल्लमलकलंक सेयरयदोस वज्जियसरीरा निरुवमलेवा अणुलोमवाउवेगा कंकरगहणी कवोतपरिणामा सउणिव्व पोसचिट्ठतरोरुपरिणया विग्गहिय उन्नयकुच्छी पउमुप्पलसरिस गंधणिस्सास सुरभिवदणा अट्ठधणुसयं ऊसिया / तेसि मणयाणं चउसद्वि पिटिकरंङगा पण्णत्ता समणाउसो ! ते णं मणुया पगइभद्दगा पगतिविणोयगा पगइउवसंता पगइपयणु कोहयाणमायालोमा मिउमद्दव संपण्णा अल्लीणा भद्दगा विणीया अप्पिच्छा असंनिहिसंचया अचंडा विडिमंतरपरिवसणा जहिच्छियकामगामिणो य ते मणुयगणा पण्णत्ता समणाउसो। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.003482
Book TitleAgam 14 Upang 03 Jivabhigam Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Rajendramuni, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages736
LanguagePrakrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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