________________ [155 द्वितीय प्रतिपत्ति : अल्पबहुत्व] जधन्य अन्तर नौ दिन, पानतकल्प से लगाकर अच्युतकल्प तक नौ मास, नव वेयकों में और सर्वार्थसिद्ध को छोड़कर शेष अनुत्तरोपपातिक देवों का अन्तर नौ वर्ष का है। वेयक तक सर्वत्र उत्कृष्ट अन्तर वनस्पतिकाल है। विजयादि चार महाविमानों में दो सागरोपम का उत्कृष्ट अन्तर है।' अल्पबहुत्व 56. अप्पाबहुयाणि जहेविस्थीणं जाव एतेसिणं भंते ! देवपुरिसाणं भवणवासीणं बाणमंतराणं जोतिसियाणं वेमाणियाण य कयरे कयरेहितो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला बा विसेसाहिया वा? गोयमा! सम्वत्योवा वेमाणियदेवपुरिसा, भवणवइदेवपुरिसा असंखेज्जगुणा, वाणमंतरदेवपुरिसा असंखेज्जगुणा, जोइसियादेवपुरिसा संखेज्जगुणा।। एतेसि णं भंते ! तिरिक्खजोणिय-पुरिसाणं जलयराणं थलयराणं खहयराणं, मणुस्सयुरिसाणं कम्मभूमगाणं अकम्मभूमगाणं अंतरदोवगाणं, देवपुरिसाणं भवणवासोणं वाणमंतराणं जोइसियाणं वेमाणियाणं सोहम्माणं जाव सव्वट्ठसिद्धगाण य कयरे कयरेहितो अप्पा वा बहुआ वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा? गोयमा ! सम्वत्थोवा अंतरदीवगमणुस्सपुरिसा, देवकुरुत्तरकुरुकम्ममूमग मणुस्सपुरिसा दो वि संखेज्जगुणा हरिवास रम्मगवास अकम्ममूमग मणुस्सपुरिसा दो वि संखेज्जगुणा, हेमवत हेरण्यवतवास अकम्मभूमग भणुस्सपुरिसा दोषि संखेज्जगुणा; भरहेरवतवास कम्ममूमग मणस्सपुरिसा दोवि संखेज्जगुणा, पुश्वविदेह अवरविदेह कम्मभूमग मणुस्सपुरिसा दोवि संखेज्जगुणा, अणुत्तरोववाइय देवपुरिसा असंखेज्जगुणा, उवरिमगेविज्ज देवपुरिसा संखेज्जगुणा, मज्झिमगेविज्ज देवपुरिसा संखेज्जगुणा, हेट्ठिमगेविज्ज देवपुरिसा संखेज्जगुणा, अच्चयकप्पे देवपुरिसा संखेज्जगुणा, जाव आणतकप्पे देवपुरिसा संखेज्जगुणा, सहस्सारे कप्पे देवपुरिसा असंखेज्जगुणा, महासुक्के कप्पे देवपुरिसा असंखेज्जगुणा, जाव माहिदे कप्पे देवपुरिसा असंखेज्जगुणा, 1. प्राईसाणादमरस्स अंतरं हीणयं मुहत्तंतो। मासहसारे अच्चुयणुत्तर दिणमासवास न // 1 // थावरकालुक्कोसो सव्वट्ठ बीयपो न उववाप्रो / दो प्रयरा विजयादिसु....... -मलयगिरिवृत्ति Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org