________________ [115 प्रथम प्रतिपत्ति : भवस्थिति का प्रतिपादन] स्पष्टता ऊपर की जा चुकी है। इतना अन्तर वनस्पतिकाय में जाने पर ही सम्भव है, अन्यत्र जाने पर नहीं। अल्पबहुत्व में सबसे थोड़े त्रस जीव हैं क्योंकि वे असंख्यात हैं। उनसे स्थावर अनन्तगुण हैं, क्योंकि वे अजघन्योत्कृष्ट अनन्तानन्त हैं। इस प्रकार दो प्रकार के संसारी जीवों की प्रतिपत्ति का वर्णन हुआ। यह दो प्रकार के जीवों की प्रतिपत्तिरूप प्रथम प्रतिपत्ति का प्रतिपादन हुआ। // प्रथम प्रतिपत्ति पूर्ण॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org