________________ 66 [जीवाजीवामिगमसूत्र प्रासालिया जहा पण्णवणाए / से तं आसालिया। से कि तं महोरगा? महोरगा जहा पण्णवणाए / से तं महोरगा। जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पण्णता, तंजहा-पज्जत्ता य अपज्जत्ता य। तं चेव गवरि सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स असंखेज्जइभागं उक्कोसेणं जोयणपुहत्तं / ठिई जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं तेवण्णं वाससहस्साई / सेसं जहा जलयराणं जाव चउगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा : से तं उरगपरिसप्पा। से कि तं भयगपरिसप्प समुच्छिम थलयरा? भयग परि० संमु० थलयरा अणेगविहा पग्णता, तंजहा-गोहा, पउला, जाय जे यावन्ने तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पण्णता, तंजहा-पज्जत्ता य अपज्जत्ता य। सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलासंखेज्जं उक्कोसेणं धणुपुहुत्तं / ठिई उक्कोसेणं बायालीसं वाससहस्साई; सेसं जहा जलयराणं जाव चउगतिया, दुआगतिया, परित्ता असंखेज्जा पण्णता। से तं भुजपरिसप्प समुच्छिमा। से तं थलयरा। से कि तं खहयरा? खहयरा चउन्विहा पण्णता, तंजहाचम्मपक्खी, लोमपक्खी, समुग्गपक्खी, विततपक्खी। से कि तं चम्मपक्खी ? चम्मपक्खी प्रणेगविहा पण्णता, तंजहावग्गुली जाव जे यावन्ने तहप्पगारा, से तं चम्मपक्खी। से किं तं लोमपक्खी ? लोमपक्खी अणेगविहा पण्णत्ता, तंजहाढंका, कंका जे यावन्ने तहप्पगारा, से तं लोमपक्खी। से कि तं समुग्गपक्खी ? समुग्गपक्खी एगागारा पण्णत्ता नहा पण्णवणाए / एवं विततपक्खी जाव जे यावण्णे तहप्पगारा, ते समासओ दुविहा पण्णता, तंजहा-पज्जसा य अपज्जताय / णाणतं सरीरोगाहणा जहन्नेणं अंगुलस्स असंखेज्जहभागं उक्कोसेणं षणपुहत्तं / ठिई उक्कोसेणं वावरिं वाससहस्साई। सेसं जहा जलयराणं जाव चउगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेज्जा पण्णत्ता / से तं खहयर संमु० तिरिक्खजोणिया। से तं संमु० पंचेविय तिरिक्खजोणिया। [36] स्थलचर संमूछिम पंचेन्द्रिय तिर्यंचयोनिक कौन हैं ? स्थलचर संमूछिम पंचेन्द्रिय तियंचयोनिक दो प्रकार के हैं-चतुष्पद स्थलचर सं. पं. तिथंच और परिसर्प सम्मु. पं. ति.। चतुष्पद स्थलचर सं. पं. तिर्यंच कौन हैं ? Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org