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________________ विषय दंड आदि सुधरवाने का प्रायश्चित्त ४१-४६ पात्र सीने जोड़ने का प्रायश्चित्त सूत्रांक ४० ४७-५६ वस्त्र सोने जोडने का प्रायश्चित्त ५७ ५८ I T 9-5 एक या तीन गली, विधि अविधि की व्याख्या, बंधन संख्या स्वरूप, तीन से अधिक बंधन की परिस्थिति गली की आवश्यकता, अविधि सीवन, गांठ कब और कैसी लगाना, सीने की आवश्यकता, अविधि के प्रायश्चित्त, अधिक जोड़, सारांश १९ गृहस्थ से धूंआ उतरवाने का प्रायश्चित्त धुंआ उतारने की विधि, धुंए का औषध रूप उपयोग पूतिकर्म दोष का प्रायश्चित्त तीन प्रकार के पूतिकर्म, उपसंहार वाक्य परिहारट्ठाणं का अर्थ | उद्देशक का सूत्र क्रमांक युक्त सारांश किन-किन सूत्रों का विषय अन्य आगमों में है अथवा नहीं है उद्देश २ , दंडयुक्त पादप्रोंछन सम्बन्धी प्रायश्चित्त पादन का अर्थ आगमों में इसके विभिन्न उपयोग पादन सम्बन्धी भ्रम आगमों से इनकी मित्रता सिद्धि काल मर्यादा, औपग्रहिक उपकरण । इत्रादि सूंघने का प्रायश्चित्त १०- १३ पदमार्ग आदि स्वयं बनाने का प्रायश्चित्त १४- १७ सूई आदि को स्वयं सुधारने का प्रायश्चित्त १८ अल्पतम कठोर भाषा बोलने का प्रायश्चित्त मच्छरदानी बनाना प्रायश्चित्त कार्य है, रखना प्रायश्चित कार्य नहीं । अल्पतम झूठ बोलने का प्रायश्चित्त अल्प झूठ के उदाहरण । Jain Education International , अल्पतम कठोर भाषा का स्वरूप, कठोर भाषा के पांच उदाहरण, कठोर भाषा का अपवाद एवं विकल्प | काण्डदंड कब, रजोहरण एवं काण्डदंडयुक्त पादन की ( ७३ ) For Private & Personal Use Only पृष्ठांक २१ २२-२४ २४-२७ २७ २८ २९-३० ३० ३१-३४ ३५ ३५ ३६ ३६ ३७ www.jainelibrary.org
SR No.003462
Book TitleAgam 24 Chhed 01 Nishith Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Trilokmuni, Devendramuni, Ratanmuni
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1991
Total Pages567
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, & agam_nishith
File Size11 MB
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