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________________ ५२ ] मनुष्यों की आयु ३२. ( १ ) तीसे णं भंते ! समाए भारहे वासे मणुआणं केवइयं कालं ठिई पण्णत्ता ? गोयमा ! जहणेणं देसूणाई तिण्णि पलिओवमाई, उक्कोसेणं तिण्णि पलिओवमाइं । [३२] (१) भगवन् ! उस समय भरतक्षेत्र में मनुष्यों की स्थिति - आयुष्य कितने काल का होता है ? गौतम! उस समय उनका आयुष्य जघन्य - कुछ कम तीन पल्योपम का तथा उत्कृष्ट - तीन पल्योपम का होता है । [जम्बूद्वीपप्रज्ञप्तिसूत्र (२) तीसे णं भंते ! समाए भारहे वासे मणुआणं सरीरा केवइअं उच्चत्तेणं पण्णत्ता ? गोयमा ! जहण्णेणं देसूणाई तिण्णि गाउआई, उक्कोसेणं तिण्णि गाउआई । (२) भगवन् ! उस समय भरतक्षेत्र में मनुष्यों के शरीर कितने ऊँचे होते हैं ? गौतम ! उनके शरीर जघन्यत: कुछ कम तीन कोस तथा उत्कृष्टः तीन कोस ऊँचे होते हैं । (३) ते णं भंते! मणुआ किंसंघयणी पण्णत्ता ? गोयमा ! वइरोसभणारायसंघयणी पण्णत्ता । (३) भगवन् ! उन मनुष्यों का संहनन कैसा होता है ? गौतम ! वे वज्र - ऋषभ - नारिच - संहनन युक्त होते हैं । हैं ? (४) तेसिं णं भंते ! मणुआणं सरीरा किंसंठिआ पण्णत्ता ? गोयमा! समचउरंससंठाणसंठिआ पण्णत्ता । तेसि णं मणुआणं बेछप्पण्णा पिट्ठकरंडयसया पण्णत्ता समणाउसो ! (४) भगवन् ! उन मनुष्यों का दैहिक संस्थान कैसा होता है ? आयुष्मन् गौतम! वे मनुष्य सम-चौरस संस्थान - संस्थित होते हैं । उनके पसलियों की दो सौ छप्पन हड्डियाँ होती हैं। (५) ते णं भंते! मणुआ कालमासे कालं किच्चा कहिं गच्छन्ति, कहिं उववज्जंति ? गोयमा! छम्मासावसेसाउ जुअलगं पसवंति, एगूणपण्णं राइंदिआई सारक्खंति, संगोवेंति; गोवेत्ता, कासित्ता, छीइत्ता, जंभाइत्ता, अक्किट्ठा, अव्वहिआ, अपरिआविआ कालमासे कालं किच्चा देवलोएसु उववज्जंति, देवलोअपरिग्गहा णं ते मणुआ पण्णत्ता । (५) भगवन्! वे मनुष्य अपना आयुष्य पूरा कर - मृत्यु प्राप्त कर कहाँ जाते हैं, कहाँ उत्पन्न ! गौतम! जब उनका आयुष्य छह मास बाकी रहता है, वे युगल - एक बच्चा, एक बच्ची उत्पन्न करते हैं। उनपचास दिन-रात उनकी सार-सम्हाल करते हैं - पालन, पोषण करते हैं, संगोपन - संरक्षण करते हैं ।
SR No.003460
Book TitleAgam 18 Upang 07 Jambudveep Pragnapti Sutra Stahanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Chhaganlal Shastri, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1986
Total Pages482
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, & agam_jambudwipapragnapti
File Size10 MB
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