SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 279
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ २२८ ] [ सूर्यप्रज्ञप्तिसूर कितने मुहूर्त मिलाने से युग के मुहूर्त पूर्ण होते हैं ? ३८४३०-१०४१+१०-११ मुहूर्त ११५० मुहूर्त ' भाग १२/६७ चूर्णित भाग मिलाने पर युग के मुहूर्त पूर्ण होते हैं। युग के दिवस कितने ? १८३० दिवस। युग के मुहूर्त कितने ? १८३०४३०-५४९०० मुहूर्त। ५४९०० मुहूर्त के कितने वासठिया भाग होते हैं ? ५४९००४६२= ३४०३८०० वासठिया भाग। - सूत्र ७३ समाप्त ॥ बारहवाँ प्राभृत समाप्त ॥ सूत्र ७९ तेरहवां प्राभृत चन्द्रमा की हानि-वृद्धि शुक्लपक्ष में वृद्धि होती है और कृष्णपक्ष में हानि होती है। शुक्लपक्ष में ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग की वृद्धि होती है। कृष्णपक्ष में ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग की हानि होती है। चन्द्रमास का प्रमाण एवं चन्द्रमास के मुहूर्तों का प्रमाण सूत्र ७२ के अनुसार जानना चाहिये। शुक्लपक्ष में ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग हैं। कृष्णपक्ष में ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग हैं । एकपक्ष १४ दिवस ४७/६२ भागात्मक है। - सूत्र ७९ समाप्त। सूत्र ८० १ युग में ६२ पूर्णिमा और ६२ अमावस्या होती हैं। अमावस्या और पूर्णिमा तक ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग होते हैं। पूर्णिमा से अमावस्या तक ४४२ मुहूर्त ४६/६२ भाग होते हैं। पूर्णिमा से पूर्णिमा तक ८८५ मुहूर्त ३०/६२ भाग होते हैं । अमावस्या से अमावस्या तक ८८५ मुहूर्त ३०/६२ भाग होते हैं। - सूत्र ८० समाप्त । ॥ तेरहवाँ प्राभृत समाप्त ॥
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy