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________________ परिशिष्ट ] सूत्र ८३ पन्द्रहवाँ प्राभृत एक मुहूर्त्त में चन्द्र की गति एक मुहूर्त में चन्द्र उस-उस मंडल के १७६८ भाग गति करता है । एक युग के अर्धमंडल १७६८ हैं । १ युग १८३० दिवस हैं । दो अर्धमंडल अर्थात् एक मंडल की परिक्रमा चन्द्र कितने रात्रि - दिवस में पूर्ण करता है ? यह ज्ञात करने के लिये - १८३० दिवस x २ अर्धमंडल ३६६० १७६८ भाग १७६८ = २ दिवस १२४ / १७६८ भाग आते हैं। १२४/१७६८ भाग के मुहूर्त्त बनाने के लिये उन्हें ३० से १२४×३० ३७२० ४६५ = २२१×१०९८०० १३७२५ = - १७६८ १७६८ २२१ = २ दिवस २ मुहूर्त्त २३ / २२१ भाग में चन्द्र १ मंडल पूर्ण करता है । एक मुहूर्त्त की गति कितनी ? ६२ मुहूर्त्त २३/२२१ भाग में चन्द्र १०९८०० भाग (मंडल का परिक्षेप) गति करता है तो एक मुहूर्त की गति जानने के लिये २४२६५८०० १३७२५ 'गुणा करने पर १७६८ भाग चन्द्र १ मुहूर्त्त में १७६८ भाग गमन करता है । सूर्य एक मुहूर्त में १८३० भाग गति करता है । सूर्य दो दिवस में १ मंडल पूर्ण करता है । अर्थात् ६० मुहूर्त्त में १०९८०० भाग गमन करता है । एक मुहूर्त में कितने भाग गमन करता है ? [२२९ -
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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