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________________ परिशिष्ट ] [ २२७ १ ऋतुवर्ष के दिवस ३६० हैं। १ ऋतुवर्ष के मुहूर्त १०८०० हैं। २. आदित्यसंवत्सर १ युग के आदित्यमास ६० हैं। १ आदित्यमास के ३० दिवस हैं। १ आदित्यमास के ९१५ हैं। १ आदित्यसंवत्सर के ३६६ दिवस हैं। १ आदित्यसंवत्सर के १०९८० मुहूर्त होते हैं। २. अभिवर्धितसंवत्सर १ अभिवर्धित मास के ३१ दिवस २९ मुहूर्त १७/६२ भाग होते हैं । १ अभिवर्धित मास के ९५९ मुहूर्त १७/६२ भाग । १ अभिवर्धित संवत्सर के ३८३ दिवस २१ मुहूर्त १८/६२ भाग होते हैं। १ अभिवर्धित संवत्सर के ११५११ मुहूर्त १८/६२ भाग होते हैं। - सूत्र ७२ समाप्त सूत्र ७३ नो युग के अहोरात्र का प्रमाण वासठिया भाग चूर्णित भाग १. नक्षत्रसंवत्सर ३२७ २२ ५१ ५५/६७ २. चन्द्रसंवत्सर ३५४ ३.ऋतुसंवत्सर ३६० ४. आदित्यसंवत्सर ३६६ ५. अभिवर्धितसंवत्सर ३८३ २१ १७९१ १ ५७ ५५/६७ नो युग के मुहूर्त १७९१४३०-५३७३०+१९-५३७४९.५७ ५५/६७ चूर्णित भाग। नो युग में कितने दिवस मिलाने पर युग पूर्ण होता है ? - ३८ दिवस १० मुहूर्त : भाग १२/६७ चूर्णित भाग मिलाने से युग पूर्ण होता है। दिवस 3 5 x x x x x x |
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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