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________________ उन्नीसवाँ प्राभृत ] माणुसणगस्स बहिया जोइसियाणं पमाणं गाहाओ - - धायइसंडप्पभिइस्स, उद्दिट्ठा तिगुणिया भवे चंदा । आइल्लचंद सहिया, अणंतराणंतरे खेत्तेग॥ रिक्खग्गह- तारागग्गं, दीव-समुद्दे जहिच्छसी णाउं । तस्ससीहिं तग्गुणियं, रिक्ख-ग्गह-तारग्गं तु ॥ बहिया उ माणुसणगस्स चंद-सूराणऽवट्ठिया जोण्हा । चंदा अभिईजुत्ता, सूरा पुण हुंति पुस्सेहिं ॥ माणुसनगम्प बहिया जोइसियाणं अंतरं - - गाहाओ - चंदाओ सूरस्स य, सूरा चंदस्स अंतरं होई । पण्णाससहस्साइं तु जोयणाणं अणूणाईं ॥ सूरस्स य सूरस्स य, ससिणो ससिणो य अंतरं होई । बाहिं तु माणुसनगस्स जोयणाणं सयसहस्सं । सूरतरिया चंदा, चंदंतरिया य दिणयरा दित्ता । . चित्ततरलेसागा, सुहलेसा मंदलेसा य ॥ 1 [१९१ माणुसनगस्स बहिया एगससीपरिवारो - गाहाओ - अट्ठासीइंच गहा, अट्ठावीसं च हुंति णक्खत्ता णं । एगससी परिवारो, एत्तो ताराण वोच्छामि ॥ छावट्ठि सहस्साइं णव चेव सयाइंपंचसयराइं । एगससी परिवारो, तारागण कोडिकोडीणं ॥ अंतोमणुस्सखेत्ते जोइसियाणं उड्ढोववण्णगाइपरूवणं - प. अंतो भणुस्सखेत्ते जे चंदिम-सूरिया गह णक्खत्त- तारारूवा ते णं देवा किं उड्ढोववण्णगा, कप्पोववण्णगा, विमाणोववण्णगा, चारोववण्णगा, चारद्वितिया, गतिरतिया गतिसमावण्णगा ? उ. ता ते णं देवा नो उड्ढोववण्णगा, नो कप्पोववण्णगा, विमाणोववण्णगा, चारोववण्णगा,
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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