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________________ ५० ] [ सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र १०. ता लोगनाभिंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहियत्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - ११. ता अच्छंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १२. ता सूरियावत्तंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १३. ता सूरियावरणंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १४. ता उत्तमंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएज्जा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १५. ता दिसादिसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहियत्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १६. ता अवयंसंसिणं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएज्जा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १७. ता धरणिखीलंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - १८. ता धरणिसिंगसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएजा, एगे एवमासु, एगे पुण एवमाहंसु - १९. ता पव्वइंदंसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहिय त्ति वएज्जा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - २०. ता पव्वयरायसि णं पव्वयंसि सूरियस्स लेस्सा पडिहया, आहियत्ति वएजा, एगे एवमाहंसु, एगे पुण एवमाहंसु - वयं पुण एवं वयामो,
SR No.003459
Book TitleSuryaprajnapti Chandraprajnapti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMadhukarmuni, Kanhaiyalal Maharaj, Shobhachad Bharilla
PublisherAgam Prakashan Samiti
Publication Year1989
Total Pages302
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Geography, agam_suryapragnapti, & agam_chandrapragnapti
File Size4 MB
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